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Home कृषि समाचार

ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार, सरस आजीविका अभियान से देशभर में SHG को मिल रही नई पहचान

Rural women's products will find a bigger market, with the Saras Aajeevika Abhiyan giving SHGs across the country a new identity.

Emran Khan by Emran Khan
August 1, 2026
in कृषि समाचार
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सरकार का लक्ष्य—हर SHG को बाजार से जोड़ना

सरकार का लक्ष्य—हर SHG को बाजार से जोड़ना

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ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत ‘सरस आजीविका‘ अभियान का विस्तार करते हुए ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए बाजार की पहुंच को और मजबूत बनाया है। खुदरा दुकानों (Retail Outlets), सरस मेलों, डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद अब अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं।

केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके उत्पादों को ब्रांड पहचान दिलाकर उन्हें स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना भी है। इसी दिशा में विभिन्न राज्यों, विशेषकर राजस्थान सहित पूरे देश में कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं।

राजस्थान सहित सभी राज्यों में होंगे सरस मेले

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार देश के सभी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) अपने-अपने राज्यों में प्रत्येक वर्ष कम से कम दो सरस मेलों का आयोजन कर सकते हैं।

इन मेलों का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना, नए बाजार उपलब्ध कराना तथा महिलाओं को अपने उत्पादों के बेहतर दाम दिलाना है।

सरस मेले आज केवल प्रदर्शनी नहीं रह गए हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए विपणन, ब्रांडिंग और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का प्रभावी मंच बन चुके हैं।

राजीविका ने तैयार किया बाजार विस्तार का रोडमैप

राजस्थान राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (राजीविका) ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बाजार की संभावनाओं और स्थानीय मांग का अध्ययन कर उन स्थानों की पहचान की है, जहां सरस मेले आयोजित किए जा सकते हैं।

इसके अलावा राज्य स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए SHG ब्रांड के तहत स्थायी रिटेल आउटलेट्स स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

इससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद केवल मेलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे वर्ष उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध रहेंगे।

सरस आजीविका अभियान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार बनकर उभरे हैं।

ग्रामीण महिलाएं आज—

  • हस्तशिल्प,
  • हथकरघा उत्पाद,
  • खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद,
  • मसाले,
  • अचार,
  • पापड़,
  • जैविक उत्पाद,
  • मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ,
  • वस्त्र,
  • सजावटी सामग्री

जैसे अनेक उत्पाद तैयार कर रही हैं।

सरस आजीविका अभियान इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहा है।

ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर विशेष जोर

ग्रामीण विकास मंत्रालय केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार भी कर रहा है।

DAY-NRLM के तहत स्वयं सहायता समूहों को—

  • ब्रांड विकास,
  • आकर्षक पैकेजिंग,
  • आधुनिक लेबलिंग,
  • उत्पाद मानकीकरण,
  • गुणवत्ता सुधार

जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इससे उनके उत्पाद संगठित बाजार और आधुनिक रिटेल चेन की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो रहे हैं।

डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ रही ग्रामीण महिलाएं

सरकार ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को e-SARAS सहित विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिससे ग्राहक देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया प्रमोशन और ऑनलाइन ब्रांडिंग का प्रशिक्षण भी महिलाओं को दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रामीण उत्पादों के लिए सबसे बड़े बाजार साबित हो सकते हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी

ग्रामीण विकास मंत्रालय अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता।

ऐसे स्वयं सहायता समूह जिनके उत्पाद गुणवत्ता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं, उन्हें चुनिंदा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने का अवसर भी दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को निर्यात के लिए तैयार करना और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना है।

निर्यात के लिए विशेष प्रशिक्षण

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) नियमित रूप से स्वयं सहायता समूहों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं को—

  • उत्पाद विकास,
  • गुणवत्ता सुधार,
  • ब्रांडिंग,
  • पैकेजिंग,
  • डिजिटल मार्केटिंग,
  • उद्यम प्रबंधन,
  • निर्यात प्रक्रिया,
  • निर्यात दस्तावेज,
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताएं

जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाती है।

इससे ग्रामीण महिलाएं केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सफल उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं को आय के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

जब महिलाओं की आय बढ़ती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला उद्यमिता ग्रामीण विकास का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर

सरस आजीविका अभियान के माध्यम से महिलाएं केवल रोजगार नहीं प्राप्त कर रहीं, बल्कि अपने स्वयं के उद्यम स्थापित कर रही हैं।

आज अनेक SHG समूह—

  • खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां,
  • हस्तशिल्प उद्योग,
  • सिलाई एवं वस्त्र निर्माण,
  • डेयरी उत्पाद,
  • प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद

का सफल संचालन कर रहे हैं।

सरकारी सहायता मिलने से इन उत्पादों की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है।

ई-कॉमर्स से बढ़ेगी बिक्री

ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अब स्थानीय बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

e-SARAS और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उनके उत्पाद देशभर के ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं।

इससे बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए भी महिलाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम

DAY-NRLM के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आज लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान, उद्यमिता और बाजार प्रबंधन जैसी गतिविधियों से जुड़ चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भारत में महिला सशक्तिकरण का सबसे सफल उदाहरण बन चुका है।

सरकार का लक्ष्य—हर SHG को बाजार से जोड़ना

ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रयास है कि देश के प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को किसी न किसी बाजार से जोड़ा जाए।

इसके लिए—

  • सरस मेले,
  • रिटेल आउटलेट,
  • डिजिटल मार्केटिंग,
  • ई-कॉमर्स,
  • व्यापार मेले,
  • उत्पाद ब्रांडिंग,
  • निर्यात प्रशिक्षण

जैसी पहलों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

राज्यसभा में दी गई जानकारी

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि DAY-NRLM के तहत ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न स्तरों पर लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर SHG उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन, डिजिटल बिक्री और निर्यात क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरस आजीविका जैसी पहलें इसी गति से आगे बढ़ती रहीं तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी मजबूत पहचान बनाएंगे। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

 

 

Tags: Agriculture. Indian AgricultureAgricyultureFaming
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