भारत सरकार की समुद्री शैवाल आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की पहल को लक्षद्वीप में बड़ी सफलता मिली है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI), कोच्चि के तकनीकी मार्गदर्शन में समुद्री शैवाल की व्यावसायिक स्तर पर खेती के लिए शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है। वर्ष 2022-23 के दौरान किए गए व्यापक पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययनों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए। इससे लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और स्थानीय समुदाय, विशेष रूप से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
यह पहल ट्यूटीकोरिन की टीएससी-पर्पल टर्टल कंपनी (TSC-Purple Turtle Company) ने ICAR-CMFRI और लक्षद्वीप प्रशासन के सहयोग से शुरू की थी। परियोजना का उद्देश्य समुद्री शैवाल की व्यावसायिक खेती की संभावनाओं का आकलन करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना था। शुरुआती चरण में मिले परिणामों ने संकेत दिया कि उचित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से समुद्री शैवाल की खेती द्वीप क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बन सकती है।
चेटलट द्वीप से हुई व्यावसायिक खेती की शुरुआत
समुद्री शैवाल की व्यावसायिक खेती की शुरुआत लक्षद्वीप के छोटे द्वीप चेटलट से की गई, जिसकी आबादी लगभग 2,500 है। सितंबर 2022 के अंत तक यहां 100 ट्यूब नेट वाले छह प्लॉट स्थापित किए गए। प्रत्येक प्लॉट में लगभग तीन टन बीज सामग्री का स्टॉक रखा गया था। खेती की तकनीक और उत्पादन क्षमता का आकलन करने के लिए इन प्लॉटों में समुद्री शैवाल का उत्पादन किया गया।
शुरुआती चरण में ही उल्लेखनीय परिणाम सामने आए। पहली कटाई लगभग 45 दिनों में हुई, जिसमें करीब 15 टन समुद्री शैवाल प्राप्त हुआ। यह उत्पादन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। पहली कटाई से प्राप्त पूरी उपज का उपयोग खेती का विस्तार करने के लिए किया गया। इससे परियोजना को शुरुआती उत्पादन के बाद तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिली।
नवंबर 2022 के अंत तक खेती का विस्तार करके 30 प्लॉट स्थापित कर दिए गए, जिनमें कुल 3,000 नेट ट्यूब शामिल थे। इसके बाद प्रत्येक 30 से 45 दिनों के अंतराल पर कटाई की जाती रही। उत्पादन के साथ-साथ खेती का विस्तार भी जारी रहा। चेटलट के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी इस गतिविधि को आगे बढ़ाया गया। बाद में पड़ोसी द्वीपों किल्टन और कदमत के एटॉल क्षेत्रों में भी समुद्री शैवाल की खेती का विस्तार किया गया।
यह विस्तार दर्शाता है कि शुरुआती स्तर पर प्राप्त उपज का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। परियोजना के माध्यम से समुद्री शैवाल की खेती की व्यावसायिक संभावनाओं को परखने और स्थानीय परिस्थितियों में इसके संचालन का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।
महिलाओं की भागीदारी से बढ़े रोजगार के अवसर
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल की खेती की इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। परियोजना में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी लगभग 20 महिलाओं को विभिन्न कृषि गतिविधियों के लिए रोजगार मिला। इनमें ट्यूब नेट तैयार करना, समुद्री शैवाल के बीज लगाना और फसल की कटाई जैसे कार्य शामिल थे।
समुद्री शैवाल की खेती ने स्थानीय महिलाओं को अपने द्वीपों में ही रोजगार पाने का अवसर उपलब्ध कराया। इससे उन्हें पारंपरिक आजीविका गतिविधियों के साथ आय का एक अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की संभावना मिली। परियोजना के आठ महीने के उत्पादन चक्र के दौरान करीब 3,000 मानव-दिवस के रोजगार का सृजन हुआ। इस अवधि में काम करने वाले श्रमिकों की औसत दैनिक कमाई लगभग 380 रुपये रही।
ये आंकड़े बताते हैं कि समुद्री शैवाल की खेती केवल एक नई कृषि या जलीय उत्पादन गतिविधि नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने वाला उद्यम भी बन सकती है। विशेष रूप से द्वीपों में महिलाओं के लिए ऐसे कार्य महत्वपूर्ण हैं, जहां आजीविका के अवसरों का विस्तार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
महिलाओं की भागीदारी ने इस परियोजना को सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाया। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने से उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इससे भविष्य में समुद्री शैवाल की खेती को अधिक व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए स्थानीय कौशल और कार्यबल विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी लिया महिलाओं की पहल का संज्ञान
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल की खेती से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का भी ध्यान आकर्षित किया। अप्रैल 2023 में लक्षद्वीप की अपनी पहली यात्रा के दौरान उन्होंने इस उद्यम से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों में रुचि दिखाई।
19 अप्रैल 2023 को कवरत्ती में समुद्री शैवाल उद्यम विकास कार्यक्रम की महिला लाभार्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए आमंत्रित किया गया। यह मुलाकात परियोजना में महिलाओं की भागीदारी और समुद्री शैवाल की खेती से पैदा हो रहे आजीविका अवसरों के महत्व को रेखांकित करती है।
महिलाओं की यह भागीदारी बताती है कि वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और निजी क्षेत्र के सहयोग से शुरू की गई पहल स्थानीय समुदायों को नई आर्थिक गतिविधियों से जोड़ सकती है। यदि इस तरह के उद्यमों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार की सुविधाओं से लगातार समर्थन मिलता रहे, तो इनका लाभ अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
वर्ष 2020 से चल रहे अनुसंधान ने तैयार की आधारभूमि
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल की खेती की संभावनाओं को समझने के लिए ICAR-CMFRI अगस्त 2020 से अनुसंधान और विकास गतिविधियां संचालित कर रहा था। यह कार्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के जलवायु अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रम (NICRA) के अंतर्गत किया गया।
समुद्री शैवाल की खेती को व्यावसायिक रूप देने से पहले विभिन्न द्वीपों में परीक्षण किए गए। ICAR-CMFRI ने लक्षद्वीप के मत्स्य विभाग और निजी कंपनियों के सहयोग से स्थानीय रूप से पाई जाने वाली व्यावसायिक महत्व की प्रजातियों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता का अध्ययन किया। इनमें Gracilaria edulis और Acanthophora spicifera प्रमुख थीं।
इन परीक्षणों का उद्देश्य अलग-अलग द्वीपों और मौसमों में इन प्रजातियों के विकास प्रदर्शन को समझना था। इसके साथ ही स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती की उपयुक्तता और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया गया।
अनुसंधान के दौरान लक्षद्वीप के कई द्वीपों के पुरुषों और महिलाओं को समुद्री शैवाल की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इससे स्थानीय लोगों को खेती की तकनीकों, उत्पादन प्रक्रिया और आवश्यक कार्यों की जानकारी मिली। परियोजना के संभावित हितधारकों, स्थानीय किसानों, समुद्री शैवाल उद्योग से जुड़े लोगों, शोधकर्ताओं और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ समय-समय पर विचार-विमर्श भी किया गया।
इन बैठकों में परीक्षणों के परिणामों और अनुभवों को साझा किया गया तथा भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। अनुसंधान, प्रशिक्षण और हितधारकों के साथ संवाद की इसी प्रक्रिया ने व्यावसायिक स्तर पर खेती शुरू करने की आधारभूमि तैयार की। इसके बाद टीएससी-पर्पल टर्टल कंपनी ने लक्षद्वीप में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर समुद्री शैवाल की खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।
समुद्री शैवाल उद्यम के विकास के लिए दोहरी रणनीति
ICAR-CMFRI ने लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल आधारित उद्यमों के विकास के लिए दोहरी रणनीति अपनाने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र की व्यावसायिक क्षमता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को एक साथ जोड़ना है।
पहले मॉडल के तहत निजी कंपनियां व्यावसायिक महत्व वाली उच्च मूल्य की स्थानीय प्रजातियों की खेती अपने स्तर पर कर सकती हैं। इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को कार्यबल के रूप में रोजगार दिया जा सकता है। इससे कंपनियों को उत्पादन संबंधी गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों को नियमित काम तथा आय के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
दूसरे मॉडल में स्थानीय समितियों, समूहों या व्यक्तियों को कंपनियों के साथ अनुबंध खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। इस व्यवस्था के तहत स्थानीय लोग खेती में भागीदारी कर सकेंगे और कंपनियों के साथ जुड़कर समुद्री शैवाल उत्पादन को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे विशेष रूप से महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर तैयार होने की संभावना है।
इस दोहरी रणनीति का प्रमुख उद्देश्य समुद्री शैवाल की खेती को केवल निजी कंपनियों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय समुदायों की आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनाना है। यदि स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जुड़ाव मिलता है, तो वे इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं से मिल सकती है उद्यम को वित्तीय सहायता
लक्षद्वीप प्रशासन मत्स्य क्षेत्र में केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और मुद्रा ऋण योजनाओं को लोकप्रिय बनाने की दिशा में सक्रिय है। इन योजनाओं के प्रति जागरूकता और उपयुक्त वित्तीय सहायता समुद्री शैवाल उद्यम के विस्तार में सहायक हो सकती है।
समुद्री शैवाल की खेती को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए शुरुआती निवेश, उत्पादन सामग्री, बुनियादी ढांचे और प्रसंस्करण जैसी जरूरतों को पूरा करना आवश्यक है। वित्तीय योजनाओं की जानकारी और उन तक पहुंच स्थानीय उद्यमियों तथा समूहों को अपनी गतिविधियां शुरू करने या उनका विस्तार करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, वित्तीय सहायता के साथ-साथ खेती की तकनीक, बीज सामग्री की उपलब्धता, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार की मांग जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। इस दिशा में वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और निजी कंपनियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हैचरी, बीज भंडार और प्रसंस्करण सुविधाओं की जरूरत
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल आधारित उद्यमों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए उत्पादन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का विकास आवश्यक है। ICAR-CMFRI के अनुसार, समुद्री शैवाल की हैचरी, बीज भंडार, समुद्री शैवाल के स्वास्थ्य की निगरानी करने वाली सुविधाएं और समुद्री खेती (मैरिकल्चर) के लिए इन्क्यूबेशन सुविधाएं स्थापित करने से इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बीज सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता उत्पादन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार, समुद्री शैवाल के स्वास्थ्य और गुणवत्ता की निगरानी से खेती की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। इन्क्यूबेशन सुविधाएं नए विचारों, तकनीकों और उद्यमों को विकसित करने के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकती हैं।
इसके अलावा, समुद्री शैवाल के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान देना होगा। कच्चे समुद्री शैवाल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की क्षमता विकसित होने से इस उद्यम के आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके लिए बाजार की जरूरतों, उत्पादों की उपयोगिता और प्रसंस्करण की उपयुक्त तकनीकों पर काम करना जरूरी होगा।
संस्थान ने विभिन्न उपयोगों वाली समुद्री शैवाल की नई प्रजातियों के लिए खेती की मानक प्रक्रियाएं विकसित करने और उन्हें प्रमाणित करने के उद्देश्य से अनुसंधान जारी रखने की आवश्यकता भी बताई है। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त प्रजातियों और खेती की तकनीकों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
वैज्ञानिक संस्थानों और सरकार के सहयोग से आगे बढ़ेगा क्षेत्र
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल उद्यम के सतत और समावेशी विकास के लिए ICAR-CMFRI नीति निर्माण और तकनीकी सहयोग के स्तर पर भी कार्य कर रहा है। संस्थान नीति आयोग, भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप प्रशासन के साथ मिलकर वैज्ञानिक जानकारी जुटाने, कौशल विकास करने और तकनीकी सहायता सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
इस सहयोग का उद्देश्य समुद्री शैवाल की खेती के लिए वैज्ञानिक आधार को मजबूत करना और ऐसी नीतिगत दिशा तैयार करना है, जिससे उत्पादन गतिविधियां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ सकें। इसके साथ ही किसानों, स्वयं सहायता समूहों, निजी कंपनियों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना भी महत्वपूर्ण है।
लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल की खेती की सफलता यह संकेत देती है कि अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों के परिणामों को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर बनाए जा सकते हैं। चेटलट में शुरुआती उत्पादन से लेकर किल्टन और कदमत तक विस्तार, महिलाओं की भागीदारी और रोजगार सृजन इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता
समुद्री शैवाल की खेती लक्षद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्र में आजीविका के नए विकल्प विकसित करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के शुरुआती परिणामों ने दिखाया है कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन, निजी कंपनियों की भागीदारी और प्रशासन के सहयोग से इस क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
विशेष रूप से महिलाओं को उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करना इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को काम मिलने और औसतन 380 रुपये प्रतिदिन की कमाई का अवसर उपलब्ध होने से इस उद्यम का स्थानीय सामाजिक-आर्थिक महत्व स्पष्ट होता है।
आगे इस क्षेत्र की प्रगति के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री, अनुसंधान, प्रशिक्षण, बुनियादी सुविधाओं, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव को मजबूत करना होगा। साथ ही, स्थानीय समुदायों को खेती के विभिन्न मॉडलों में भागीदारी का अवसर देना आवश्यक होगा।
ICAR-CMFRI के मार्गदर्शन में लक्षद्वीप में शुरू हुई यह पहल समुद्री शैवाल को एक संभावित आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि वैज्ञानिक अनुसंधान, सरकारी सहयोग, निजी निवेश और स्थानीय लोगों की भागीदारी के बीच प्रभावी तालमेल बना रहता है, तो समुद्री शैवाल की खेती आने वाले समय में द्वीपों की अर्थव्यवस्था और विशेषकर महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

