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आवारा मवेशियों पर सख्ती: हिमाचल में ‘गोपाल योजना’ को मिला 14.68 करोड़ का बूस्टर

Fiza by Fiza
April 8, 2026
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आवारा मवेशियों पर सख्ती: हिमाचल में ‘गोपाल योजना’ को मिला 14.68 करोड़ का बूस्टर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आवारा और बेसहारा मवेशियों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये का रखरखाव अनुदान जारी किया है, जिससे राज्यभर में छोड़ी गई गायों को बेहतर आश्रय और देखभाल मिल सके। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि किसानों को होने वाले नुकसान को भी कम करना है।

सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, आवारा मवेशियों की वजह से किसानों को लंबे समय से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। खेतों में खड़ी फसलें इन मवेशियों द्वारा नष्ट कर दी जाती थीं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता था। कई इलाकों में हालात इतने खराब हो गए थे कि किसानों को खेती का काम कम करना पड़ा या पूरी तरह छोड़ने की नौबत आ गई थी।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता में रखा है। ‘गोपाल योजना’ के तहत अब रजिस्टर्ड गौशालाओं और गौ अभयारण्यों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा रहा है, ताकि वे बेसहारा गायों की बेहतर देखभाल कर सकें। इस दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने प्रति गाय मिलने वाले मासिक अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दिया है। यह नई दर 1 अक्टूबर, 2025 से लागू हो चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि यह बढ़ी हुई सहायता हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग के माध्यम से वितरित की जा रही है। इसका उद्देश्य गायों के लिए बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रबंधन सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से गौशालाओं की क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

इसके साथ ही राज्य सरकार गौसदनों और गौ अभयारण्यों के निर्माण पर भी जोर दे रही है। हाल के वर्षों में कई बड़े गौसदन स्थापित किए गए हैं, जहां आवारा मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सके। खास बात यह है कि सरकार ने इन गौशालाओं को स्वैच्छिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) और निजी कंपनियों को गोद लेने की अनुमति भी दी है, ताकि इनके संचालन में सहयोग मिल सके।

सरकार का यह भी मानना है कि आवारा मवेशियों का उचित पुनर्वास न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी बेहतर बनाएगा। अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में आवारा पशु बड़ी वजह बनते हैं, जिससे लोगों की जान-माल को खतरा रहता है।

आगे की योजना के तहत, वित्तीय वर्ष 2027 के बजट में भी इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई नए प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। कुल मिलाकर, ‘गोपाल योजना’ को मिली यह वित्तीय मजबूती हिमाचल प्रदेश में आवारा मवेशियों की समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों और आम जनता दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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