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Home कृषि समाचार

पराली को समस्या नहीं, संसाधन बनाएगी सरकार; 544 करोड़ रुपये की योजना के साथ 46 हजार मशीनें बांटी जाएंगी: शिवराज सिंह चौहान

Stubble is not a problem, the government will create resources

Emran Khan by Emran Khan
June 17, 2026
in कृषि समाचार
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पराली को समस्या नहीं, संसाधन बनाएगी सरकार; 544 करोड़ रुपये की योजना के साथ 46 हजार मशीनें बांटी जाएंगी: शिवराज सिंह चौहान
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पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान निकालने और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में पराली प्रबंधन की समीक्षा करते हुए राज्यों को प्रभावी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में आगामी धान कटाई सीजन के दौरान पराली प्रबंधन की तैयारियों और फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।

पराली जलाना मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाने से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं बढ़ता, बल्कि यह मिट्टी की गुणवत्ता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। पराली जलाने से खेतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव और कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता कम होती है। इसके अलावा धुएं के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और कृषि दोनों की सुरक्षा के लिए पराली जलाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाना आवश्यक है।

2018 से अब तक 4,266 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

कृषि मंत्री ने बताया कि पराली प्रबंधन की चुनौती से निपटने के लिए वर्ष 2018-19 में फसल अवशेष प्रबंधन योजना शुरू की गई थी। इसके तहत अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को कुल 4,266.47 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

इस सहायता से राज्यों में 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें किसानों तक पहुंचाई गई हैं। साथ ही 43,500 से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां किसान किराये पर मशीनें लेकर पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन कर सकते हैं।

2026-27 के लिए 544 करोड़ रुपये का प्रावधान

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए CRM योजना के अंतर्गत 544.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें से 272.07 करोड़ रुपये की पहली किस्त पहले ही जारी की जा चुकी है।

इस वर्ष राज्यों ने कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें 46,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण, 910 नए कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना तथा 141 पराली आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं का विकास शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि जलाने की आवश्यकता ही न पड़े।

2.76 करोड़ टन पराली के प्रबंधन की तैयारी

बैठक में वर्ष 2026 के धान कटाई सीजन के दौरान लगभग 2.76 करोड़ टन पराली उत्पन्न होने का अनुमान प्रस्तुत किया गया। इस विशाल मात्रा के प्रबंधन के लिए राज्यों ने विस्तृत कार्ययोजनाएं तैयार की हैं।

केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि अगस्त 2026 तक मशीनों का वितरण पूरा कर लिया जाए तथा कस्टम हायरिंग सेंटरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए। इसके अलावा किसानों के बीच जागरूकता अभियान भी तेज किए जाएंगे।

बायोमास, सीबीजी और एथेनॉल उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में पराली के औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि बायोमास आधारित बिजली संयंत्रों, संपीड़ित बायोगैस (CBG) इकाइयों, एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों और पेलेट एवं ब्रिकेट निर्माण इकाइयों में पराली का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

इन प्रयासों से पराली के लिए स्थायी बाजार विकसित हो रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी और कृषि अवशेष को आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

“पराली को समस्या नहीं, संसाधन बनाएंगे”

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य पराली को एक समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे आय और ऊर्जा के स्रोत में बदलना है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मॉडल विकसित कर रही है जिनसे किसान पराली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

उन्होंने कहा, “हम पराली को समस्या से संसाधन में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का भी माध्यम बनेगा।”

कम अवधि वाली धान किस्मों पर जोर

बैठक में कम अवधि में पकने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली धान की किस्मों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे धान कटाई और गेहूं बुवाई के बीच उपलब्ध समय बढ़ेगा, जिससे किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा।

कृषि मंत्री ने बताया कि ICAR और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से लंबी अवधि वाली धान किस्मों को हतोत्साहित करने और बेहतर विकल्पों को बढ़ावा देने का अभियान जारी है।

NCR में सक्रिय होगी ‘स्टबल प्रोटेक्शन फोर्स’

पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के 14 जिलों की 70 तहसीलों में ‘स्टबल प्रोटेक्शन फोर्स’ को सक्रिय किया जाएगा।

यह विशेष निगरानी तंत्र धान की बुवाई से लेकर कटाई तक स्थिति पर नजर रखेगा और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय करेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे NCR क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

किसानों के सफल अनुभवों का होगा प्रचार

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे पराली प्रबंधन के सफल मॉडलों और किसानों के प्रेरणादायक अनुभवों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में पराली को जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाया गया है, वहां मिट्टी की गुणवत्ता और फसल उत्पादकता में सुधार देखा गया है।

ऐसे उदाहरणों को किसानों तक पहुंचाने से पराली जलाने की प्रवृत्ति में कमी आएगी और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा।

DSR तकनीक पर भी रहेगा फोकस

बैठक में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। यह तकनीक कम पानी में धान की खेती को संभव बनाती है और पराली प्रबंधन की समस्या को भी कम करने में मददगार मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि DSR तकनीक के विस्तार से जल संरक्षण, लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ रहा है देश

बैठक के अंत में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने दोहराया कि केंद्र सरकार पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मशीनीकरण, तकनीकी नवाचार, औद्योगिक उपयोग, जन-जागरूकता और राज्यों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से इस चुनौती का समाधान किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि यदि पराली प्रबंधन को कृषि और उद्योग दोनों से जोड़ा जाए तो यह न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

Tags: AgricultureFarmingKrishiParali Prabandhan
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