Stubble Management: धान और गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचने वाला फसल अवशेष किसानों के लिए लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहा है। खासकर धान की कटाई के बाद किसान को गेहूं की बुवाई के लिए बहुत कम समय मिलता है। ऐसी स्थिति में खेत जल्दी साफ करने के लिए कई किसान पराली जला देते हैं। देखने में यह तरीका आसान और कम खर्च वाला लगता है, लेकिन लंबे समय में इससे किसान को ही कई तरह का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही कारण है कि अब Crop Residue Management यानी फसल अवशेष प्रबंधन पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, स्ट्रॉ बेलर और बायो-डीकंपोजर जैसी तकनीकों के माध्यम से पराली का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ऐसे में एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है कि पराली न जलाने वाले किसानों को क्या फायदा होता है? क्या केवल पर्यावरण बचाना ही इसका फायदा है, या किसान की खेती और आमदनी पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है?
असल में पराली न जलाने से किसान को मिट्टी की गुणवत्ता, खाद की लागत, नमी संरक्षण, फसल उत्पादन और कई दूसरे क्षेत्रों में फायदा मिल सकता है। सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो वही पराली, जिसे पहले समस्या माना जाता था, खेती के लिए एक उपयोगी संसाधन बन सकती है।
पराली क्या होती है?
धान, गेहूं और दूसरी फसलों की कटाई के बाद खेत में तना, पुआल, डंठल और पौधों के दूसरे हिस्से रह जाते हैं। इन्हें सामान्य तौर पर फसल अवशेष या पराली कहा जाता है।कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में अवशेष खेत में रह जाते हैं। किसान को कुछ ही दिनों के भीतर अगली फसल की तैयारी करनी होती है, इसलिए खेत को जल्दी साफ करना जरूरी हो जाता है।
पराली को हटाने के लिए किसान के पास मोटे तौर पर दो रास्ते होते हैं। पहला है इसे जलाना और दूसरा है इसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना।
दूसरे विकल्प को ही Stubble Management या Crop Residue Management कहा जाता है। इसमें पराली को खेत में मिलाना, मल्च के रूप में इस्तेमाल करना, खाद बनाना, मशीनों से इकट्ठा करना या दूसरे उद्योगों को देना शामिल हो सकता है।
किसान पराली क्यों जलाते हैं?
पराली जलाने के पीछे केवल जागरूकता की कमी को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। किसानों के सामने व्यावहारिक समस्याएं भी होती हैं।धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय बहुत कम होता है। किसान जल्दी से जल्दी खेत तैयार करना चाहता है। छोटे और सीमांत किसानों के पास महंगी कृषि मशीनें खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा भी नहीं होता।
कई क्षेत्रों में पराली खरीदने या उठाने की मजबूत व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में किसान के सामने खेत साफ करने का सबसे आसान तरीका पराली जलाना दिखाई देता है।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि संस्थानों द्वारा Stubble Burning Alternatives को बढ़ावा दिया जा रहा है।लेकिन जब किसान पराली को जलाने के बजाय सही तरीके से इस्तेमाल करता है तो उसे कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकते हैं।
1. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद
पराली न जलाने वाले किसानों को क्या फायदा मिलता है, इसका पहला बड़ा उत्तर मिट्टी से जुड़ा है।पराली केवल बेकार पुआल नहीं होती। फसल अवशेषों में जैविक पदार्थ मौजूद होते हैं। इन्हें खेत में मिलाने या सड़ाकर इस्तेमाल करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।इसके विपरीत, लगातार फसल अवशेष जलाने से खेत की ऊपरी सतह अधिक तापमान के संपर्क में आती है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी जैविक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।यदि किसान पराली को मिट्टी में मिला देता है, तो धीरे-धीरे इसके विघटन से मिट्टी की संरचना बेहतर बनाने में मदद मिलती है।लंबे समय में अच्छी मिट्टी का मतलब है बेहतर जड़ विकास, नमी का बेहतर उपयोग और पौधों को पोषक तत्व मिलने की बेहतर स्थिति।इसी वजह से Benefits of Not Burning Stubble में soil health सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।
2. पराली से जैविक खाद तैयार की जा सकती है
पराली को जलाने की बजाय किसान उससे खाद तैयार कर सकता है।आज कई प्रकार की decomposer technology उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से फसल अवशेष को सड़ाकर खाद में बदला जा सकता है। ICAR-IARI के अनुसार Pusa Decomposer जैसी तकनीक फसल अवशेष के प्राकृतिक विघटन को तेज करके उसे लगभग 20 से 25 दिनों में पोषक तत्वों वाले जैविक पदार्थ में बदलने में मदद कर सकती है।इसका मतलब है कि जिस पराली को किसान पहले बेकार समझ रहा था, वही खेत के लिए उपयोगी जैविक पदार्थ बन सकती है।पराली से खाद बनाने के फायदे केवल पराली हटाने तक सीमित नहीं हैं। जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना सुधारने और उसकी पानी रोकने की क्षमता को बेहतर बनाने में भी उपयोगी हो सकता है।
कुछ स्थानों पर crop residue composting से किसानों की रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम होने के उदाहरण भी सामने आए हैं। ICAR द्वारा उत्तर प्रदेश में बताए गए एक कार्यक्रम में कम्पोस्ट इस्तेमाल करने वाले किसानों में रासायनिक इनपुट लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई और औसत बचत लगभग 5,000 रुपये प्रति एकड़ बताई गई। यह परिणाम स्थान, मिट्टी, फसल और प्रबंधन पद्धति के अनुसार बदल सकता है।
3. रासायनिक खाद की जरूरत कम करने में मदद
खेती में खाद किसान के प्रमुख खर्चों में से एक है।अगर खेत में जैविक पदार्थ कम होता जाए तो किसान को फसल उत्पादन बनाए रखने के लिए बाहरी इनपुट पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।पराली को खेत में सही तरीके से मिलाने से जैविक पदार्थ वापस मिट्टी में पहुंचता है। समय के साथ इससे पोषक तत्वों के बेहतर चक्रण में मदद मिल सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पराली का उपयोग करते ही किसान रासायनिक खाद पूरी तरह बंद कर सकता है। खाद की वास्तविक आवश्यकता मिट्टी की जांच, फसल, उपज लक्ष्य और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय होनी चाहिएलेकिन वैज्ञानिक Crop Residue Management अपनाने से लंबे समय में fertilizer management अधिक संतुलित किया जा सकता है।
4. मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद
पराली को मल्च की तरह खेत की सतह पर रखा जाए तो इसका एक बड़ा फायदा soil moisture conservation यानी मिट्टी की नमी बचाने में मिल सकता है।फसल अवशेष मिट्टी की सतह को सीधे धूप के संपर्क से कुछ हद तक बचाते हैं। इससे मिट्टी से पानी के तेज वाष्पीकरण को कम करने में मदद मिल सकती है।जिन क्षेत्रों में सिंचाई का पानी सीमित है, वहां यह फायदा महत्वपूर्ण हो सकता है।नमी लंबे समय तक रहने पर सिंचाई प्रबंधन बेहतर हो सकता है और पौधों को पानी की कमी से होने वाले तनाव से बचाने में भी मदद मिल सकती है।यही वजह है कि Sustainable Farming में crop residue retention को एक उपयोगी तरीका माना जाता है।
5. खेती की लागत में आएगी कमी
किसान के लिए किसी भी तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होता है कि उससे खर्च कितना कम होगा या आमदनी कितनी बढ़ेगी।यदि किसान उचित मशीन और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार पराली प्रबंधन करे तो कुछ परिस्थितियों में खेत तैयार करने की लागत कम की जा सकती है।उदाहरण के लिए Happy Seeder जैसी मशीनों की मदद से कुछ प्रणालियों में फसल अवशेष के बीच सीधे गेहूं की बुवाई की जा सकती है। इससे खेत को पूरी तरह साफ करने की आवश्यकता नहीं रहती।हालांकि लागत का वास्तविक फायदा मशीन का किराया, डीजल की कीमत, खेत का आकार, मिट्टी की स्थिति और स्थानीय Custom Hiring Centre की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।इसलिए किसान को केवल किसी मशीन का नाम देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से स्थानीय लागत की तुलना करना बेहतर रहता है।
6. पराली बेचकर कमाएं ज्यादा मुनाफा
हर जगह पराली को खेत में मिलाना जरूरी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में किसान इसे इकट्ठा करके बेच भी सकता है।धान और गेहूं के अवशेष का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है, जैसे:
- बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन
- कम्पोस्ट तैयार करना
- पैकेजिंग सामग्री
- कुछ औद्योगिक उपयोग
- पशु बिछावन के कुछ उपयोग
- बायोगैस और Bio-CNG परियोजनाएं
जहां biomass plants, baler operators या residue collection centres उपलब्ध हैं, वहां किसान के लिए पराली अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है।हालांकि पराली की खरीद कीमत और उपलब्ध बाजार हर जिले में अलग हो सकता है। इसलिए किसान को स्थानीय खरीदार और परिवहन लागत की जानकारी पहले लेनी चाहिए।
7. खेत में मौजूद लाभकारी जीवों की सुरक्षा
स्वस्थ मिट्टी केवल मिट्टी के कणों से नहीं बनती। इसमें बड़ी संख्या में सूक्ष्म जीव और दूसरे जीव मौजूद रहते हैं।ये जीव जैविक पदार्थ को विघटित करने, पोषक तत्वों के चक्रण और मिट्टी की संरचना बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।पराली जलाने के दौरान खेत की सतह पर अचानक अधिक गर्मी पैदा होती है। इससे ऊपरी मिट्टी में मौजूद कई जैविक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।जब किसान अवशेषों को जलाने की बजाय सड़ाता या मिट्टी में मिलाता है तो वह प्राकृतिक soil ecosystem को बेहतर बनाए रखने में योगदान देता है।
8. वायु प्रदूषण कम करने में योगदान
पराली जलाने से धुआं और कण वातावरण में जाते हैं। बड़े पैमाने पर crop residue burning होने पर स्थानीय और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।CPCB द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन-सार में crop residue burning की अवधि के दौरान कई respiratory complaints में वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।इसलिए Benefits of Not Burning Stubble for Farmers केवल खेत तक सीमित नहीं हैं। इससे किसान, उसका परिवार, गांव और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को साफ हवा बनाए रखने में मदद मिलती है।खासकर खेत के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए धुएं में कमी महत्वपूर्ण है।
9. आग फैलने का जोखिम होगा कम
खेत में पराली जलाने के दौरान हवा तेज हो तो आग नियंत्रण से बाहर जा सकती है।आसपास खड़ी फसल, पेड़, कृषि उपकरण या दूसरी संपत्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है।किसान अगर पराली को जलाने के बजाय मशीन या decomposer की मदद से प्रबंधित करता है तो खेत में अनियंत्रित आग लगने का यह जोखिम काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।इस प्रकार Stubble Management केवल पर्यावरण का मामला नहीं बल्कि farm safety से भी जुड़ा हुआ है।
10. अगली फसल के लिए बेहतर खेत तैयार करने में मदद
फसल अवशेष प्रबंधन का सही तरीका अगली फसल की खेती को आसान बना सकता है।उदाहरण के लिए Super Seeder, Happy Seeder और दूसरी residue management machines फसल अवशेष को संभालते हुए गेहूं की बुवाई में मदद करती हैं।यह तरीका खासकर उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है जहां धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय कम होता है।इस तरह किसान का लक्ष्य केवल “पराली हटाना” नहीं रहता, बल्कि पराली को cropping system का हिस्सा बनाना होता है।
11. लंबे समय में Sustainable Farming की दिशा में फायदा
आज खेती के सामने मिट्टी की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता जैसी कई चुनौतियां हैं।ऐसे में खेती की ऐसी तकनीकों की जरूरत बढ़ रही है जिनमें संसाधनों का बेहतर उपयोग हो।ICAR के प्रकाशित कृषि साहित्य में residue retention सहित regenerative agriculture practices को मिट्टी में जैविक पदार्थ, water retention और microbial activity सुधारने से जोड़ा गया है।इसलिए पराली प्रबंधन को अकेले प्रदूषण रोकने की कार्रवाई के रूप में देखने के बजाय sustainable agriculture strategy के रूप में देखना अधिक उपयोगी है।
पराली जलाने की जगह किसान क्या कर सकते हैं?
अब सवाल आता है कि पराली जलाने की जगह क्या करें?किसान के पास कई विकल्प हो सकते हैं। कौन सा तरीका सबसे अच्छा रहेगा यह फसल, खेत का आकार, उपलब्ध मशीन, मजदूरी और स्थानीय बाजार पर निर्भर करेगा।
1. Happy Seeder का इस्तेमाल
Happy Seeder धान के अवशेषों के बीच गेहूं की बुवाई करने में उपयोगी मशीन है।इसका फायदा यह है कि किसान को हर हाल में खेत से पूरा पुआल हटाने की आवश्यकता नहीं रहती।
2. Super Seeder का उपयोग
Super Seeder फसल अवशेष को काटकर मिट्टी में मिलाने के साथ अगली फसल की बुवाई में मदद कर सकता है।यह उन किसानों के लिए एक विकल्प हो सकता है जो in-situ residue management करना चाहते हैं।
3. Mulcher का उपयोग
Mulcher पराली को छोटे टुकड़ों में काट देता है। इसके बाद अवशेष को खेत में फैलाया या मिट्टी में मिलाया जा सकता है।
4. Baler से पराली की गांठ बनाना
Baler machine से पुआल को इकट्ठा करके गांठों में बांधा जा सकता है।इन bales को biomass plants या दूसरे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना आसान होता है।जहां पराली का बाजार उपलब्ध हो, वहां यह तरीका आर्थिक रूप से उपयोगी हो सकता है।
5. Pusa Decomposer का इस्तेमाल
फसल अवशेष के decomposition को तेज करने के लिए decomposer technology का इस्तेमाल किया जा सकता है।इससे पराली धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थ के रूप में शामिल हो सकती है।
6. कम्पोस्ट तैयार करना
किसान पराली का उपयोग compost बनाने में भी कर सकता है।इससे खेत में उपयोग के लिए जैविक खाद तैयार की जा सकती है।
छोटे किसानों के लिए पराली प्रबंधन कैसे संभव है?
अक्सर सवाल उठता है कि बड़े किसान तो मशीन खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे किसान क्या करें?इसका समाधान मशीन खरीदना ही नहीं है।कई क्षेत्रों में Custom Hiring Centre और cooperative model के माध्यम से कृषि मशीनें किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे किसान को लाखों रुपये की मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।कुछ किसान मिलकर भी मशीन किराए पर ले सकते हैं। इससे प्रति एकड़ लागत कम हो सकती है।ICAR ने भी क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त Crop Residue Management मशीनों और Custom Hiring Centres की भूमिका पर जोर दिया है।इसलिए छोटे किसान के लिए सबसे पहले अपने जिले के कृषि विभाग, KVK या Custom Hiring Centre से उपलब्ध मशीन और किराए की जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।
क्या पराली न जलाने पर सरकारी फायदा भी मिलता है?
केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें समय-समय पर Crop Residue Management को बढ़ावा देने के लिए मशीनों, Custom Hiring Centres और दूसरी गतिविधियों से संबंधित योजनाएं चलाती हैं।इनका स्वरूप राज्य, वर्ष और किसान की श्रेणी के अनुसार बदल सकता है।
इसलिए किसी निश्चित subsidy amount को पूरे देश के लिए समान मानना सही नहीं होगा।2026 में भी Commission for Air Quality Management ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित संबंधित क्षेत्रों के लिए paddy stubble burning रोकने और crop residue management मजबूत करने पर जोर दिया है।किसान को मशीन खरीदने या कोई आवेदन करने से पहले अपने राज्य के कृषि विभाग की वर्तमान योजना और पात्रता अवश्य जांचनी चाहिए।
पराली प्रबंधन से किसान की आय कैसे बढ़ सकती है?
पराली प्रबंधन से किसानों की आय कैसे बढ़ाएं यह प्रश्न केवल पराली बेचने तक सीमित नहीं है। आय बढ़ने या लागत घटने के कई रास्ते हो सकते हैं।
- पहला, अगर crop residue मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और fertilizer efficiency बढ़ाने में मदद करे तो कृषि लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
- दूसरा, biomass या compost market उपलब्ध होने पर अवशेष स्वयं एक आर्थिक संसाधन बन सकता है।
- तीसरा, soil moisture conservation के कारण कुछ परिस्थितियों में सिंचाई प्रबंधन बेहतर हो सकता है।
- चौथा, किसान अगर residue management machinery service शुरू करता है तो आसपास के किसानों को मशीन किराए पर देकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी बन सकता है।
इसलिए भविष्य में पराली को “कचरा” मानने की बजाय agricultural resource के रूप में देखने की आवश्यकता है।
क्या पराली खेत में छोड़ने से फसल खराब हो सकती है?
यह एक आम सवाल है। केवल बड़ी मात्रा में पराली को बिना किसी प्रबंधन के खेत में छोड़ देना हमेशा सही समाधान नहीं है। इससे बुवाई में समस्या आ सकती है और decomposition धीमा हो सकता है।इसलिए residue management वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए।अवशेष की मात्रा, फसल, मिट्टी और अगली बुवाई को देखते हुए mulching, incorporation, seeding machine या decomposer में से सही तरीका चुना जाना चाहिए।यही कारण है कि How to Manage Paddy Stubble Without Burning का उत्तर हर किसान के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता।
पराली न जलाने से गांव को क्या फायदा होता है?
जब किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान crop residue burning कम करते हैं तो फायदा पूरे गांव को मिलता है।धुआं कम होने से आसपास की हवा पर दबाव कम होता है। सड़कों पर धुएं से दृश्यता प्रभावित होने का जोखिम घट सकता है।गांव के बच्चों, बुजुर्गों और खेतों में काम करने वाले लोगों को भी धुएं के सीधे संपर्क से बचाने में मदद मिलती है।साथ ही जब गांव में machines sharing, baler service और composting जैसी गतिविधियां शुरू होती हैं तो स्थानीय स्तर पर नए काम और सेवाओं के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
पराली को समस्या नहीं, संसाधन समझने की जरूरत
लंबे समय तक पराली को केवल कृषि कचरे के रूप में देखा गया।लेकिन आधुनिक Crop Residue Management का विचार अलग है।आज वही crop residue compost, mulch, biomass और organic matter के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।अगर इसके लिए गांव स्तर पर मशीन, transport और market की अच्छी व्यवस्था विकसित हो जाए तो पराली किसानों के लिए बोझ के बजाय एक उपयोगी resource बन सकती है।यही Sustainable Stubble Management Techniques का असली उद्देश्य है।
किसानों को पराली प्रबंधन अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
हर किसान की परिस्थिति अलग होती है। इसलिए केवल किसी दूसरे किसान को देखकर तकनीक अपनाने की बजाय अपने खेत के अनुसार निर्णय लेना बेहतर है।सबसे पहले किसान को अगली फसल और बुवाई के समय को देखना चाहिए।इसके बाद यह पता करना चाहिए कि आसपास कौन-सी मशीन उपलब्ध है और उसका किराया कितना है।
यदि पराली बेचने की योजना है तो खरीदार, कीमत और transportation cost पहले पता करना जरूरी है।अगर decomposer इस्तेमाल करना है तो कृषि विशेषज्ञ द्वारा बताए गए तरीके और मौसम की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।साथ ही soil testing करवाकर खाद की जरूरत तय करना अधिक उपयोगी रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पराली न जलाने वाले किसानों को क्या फायदा मिलता है?
पराली न जलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थ सुरक्षित रखने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, नमी बचाने, खाद तैयार करने और कुछ परिस्थितियों में कृषि लागत कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा वायु प्रदूषण और खेत में आग फैलने का जोखिम भी कम होता है।
क्या पराली से किसान पैसा कमा सकता है?
कुछ क्षेत्रों में हां। यदि biomass plant, residue buyer या दूसरे उद्योग उपलब्ध हों तो baler की मदद से पराली इकट्ठी कर बेचने का विकल्प हो सकता है। वास्तविक आमदनी स्थानीय कीमत और परिवहन लागत पर निर्भर करेगी।
पराली जलाने की जगह सबसे अच्छा तरीका कौन सा है?
कोई एक तरीका हर किसान के लिए सबसे अच्छा नहीं है। Happy Seeder, Super Seeder, Mulcher, Baler, composting और decomposer अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं।
क्या पराली से खाद बनाई जा सकती है?
हां। सही decomposer और composting प्रक्रिया की मदद से crop residue को जैविक खाद या organic matter में बदला जा सकता है।
क्या छोटे किसान भी Crop Residue Management कर सकते हैं?
हां। मशीन खरीदने के बजाय Custom Hiring Centre, सहकारी समिति या समूह के माध्यम से मशीन किराए पर लेना एक विकल्प हो सकता है।
क्या पराली खेत में मिलाना फायदेमंद है?
सही तरीके से crop residue incorporation करने पर मिट्टी में organic matter बढ़ाने और soil health सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका तरीका फसल और मिट्टी के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
अगर आसान भाषा में पूछा जाए कि पराली न जलाने वाले किसानों को क्या फायदा होता है, तो इसका जवाब केवल “प्रदूषण कम होता है” नहीं है।पराली न जलाने से किसान मिट्टी की उर्वरता और जैविक पदार्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। फसल अवशेष से खाद बनाई जा सकती है, मिट्टी में नमी बचाई जा सकती है और कुछ परिस्थितियों में खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
जहां उचित बाजार उपलब्ध हो वहां पराली बेचकर अतिरिक्त आय की संभावना भी बन सकती है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पराली को बेकार कृषि कचरे के रूप में देखने की सोच बदलनी होगी। सही Crop Residue Management के साथ यही पराली मिट्टी के लिए organic matter, उद्योग के लिए biomass और किसान के लिए उपयोगी संसाधन बन सकती है।
हालांकि हर क्षेत्र और हर किसान की परिस्थिति अलग है। इसलिए Best Alternatives to Stubble Burning in India चुनते समय मशीन की उपलब्धता, खेत का आकार, अगली फसल, मजदूरी, पानी, मौसम और स्थानीय बाजार को ध्यान में रखना जरूरी है।
सरकार, कृषि संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल के साथ पराली प्रबंधन केवल प्रदूषण कम करने का साधन नहीं, बल्कि अधिक टिकाऊ और आर्थिक रूप से मजबूत खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन सकता है।

