अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के ऐलान ने देश के कई कारोबारी सेक्टरों में चिंता की लहर पैदा कर दी थी। खासतौर पर सीफूड एक्सपोर्ट इंडस्ट्री, और उसमें भी झींगा (श्रिम्प) कारोबार को लेकर निराशा का माहौल बन गया था। वजह साफ थी—अमेरिका भारतीय झींगा का सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में 58.26 फीसदी तक टैरिफ बढ़ने की खबर ने कारोबारियों और किसानों दोनों को चिंता में डाल दिया था।
लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। तमाम आशंकाओं के उलट, भारतीय झींगा एक्सपोर्ट में गिरावट नहीं बल्कि बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि टैरिफ के दबाव के बावजूद भारत का सीफूड एक्सपोर्ट लगातार मजबूत बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020-21 में भारत से 17,990 करोड़ रुपये का सीफूड एक्सपोर्ट हुआ था, जो बढ़कर 2024-25 में 22,723 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह मात्रा के लिहाज से भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है—2020-21 में जहां 2.91 लाख मीट्रिक टन एक्सपोर्ट हुआ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 3.46 लाख मीट्रिक टन हो गया।
इस बढ़ोतरी के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। झींगा किसान और विशेषज्ञ डॉ. मनोज शर्मा के मुताबिक, अमेरिकी बाजार में भारतीय झींगा की एक मजबूत पहचान और भरोसा बना हुआ है। अमेरिका के कई आयातक वर्षों से भारतीय उत्पाद खरीदते आ रहे हैं और क्वालिटी को लेकर उनका भरोसा कायम है। यही वजह है कि टैरिफ बढ़ने के बावजूद कई खरीदार ज्यादा कीमत चुकाकर भी भारतीय झींगा खरीदना जारी रखे हुए हैं।
इसके अलावा, भारत ने अपनी एक्सपोर्ट रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले जहां झींगा का बड़ा हिस्सा अमेरिका और चीन जैसे देशों में जाता था, वहीं अब सरकार और निर्यातकों ने नए बाजारों की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के कई देशों में भारतीय झींगा की सप्लाई बढ़ाई गई है, जिससे कुल एक्सपोर्ट पर सकारात्मक असर पड़ा है।
हालांकि अमेरिका ने हाल ही में टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन यह साफ हो गया है कि भारतीय सीफूड सेक्टर ने वैश्विक चुनौतियों के बीच खुद को ढालने की क्षमता दिखा दी है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ का असर जितना बड़ा माना जा रहा था, उतना हुआ नहीं। भारतीय झींगा ने न सिर्फ अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखी है, बल्कि नए बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह भारत के सीफूड सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है और आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावनाएं दिख रही हैं।

