देश में प्याज उगाने वाले किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण भारत तक किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब जीआई टैग प्राप्त मशहूर ‘बैंगलोर रोज’ प्याज के किसान भी आर्थिक संकट में फंस गए हैं। कर्नाटक के कोलार, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु ग्रामीण इलाकों में उगने वाला यह खास प्याज, जो अपनी तीखी स्वाद और गहरे लाल रंग के लिए जाना जाता है, आज औने-पौने दाम पर बिकने को मजबूर है।
चिकबल्लापुर के सांसद के. सुधाकर ने इस गंभीर स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ‘बैंगलोर रोज’ प्याज की खेती करने वाले किसान भारी संकट का सामना कर रहे हैं। यह प्याज आम प्याज से अलग और खास किस्म का होता है, जिसकी मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी रहती है। लेकिन मौजूदा हालात ने इसकी पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है।
डॉ. सुधाकर के मुताबिक, इस संकट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रही जंग है। इस संघर्ष के चलते निर्यात पर बुरा असर पड़ा है, जिससे ‘बैंगलोर रोज’ प्याज की मांग अचानक गिर गई है। चूंकि यह फसल काफी हद तक निर्यात पर निर्भर रहती है, इसलिए जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हुआ, किसानों की कमर टूट गई।
कीमतों में आई गिरावट ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। जहां पहले यह प्याज 1,200 से 1,500 रुपये प्रति बोरी तक बिकता था, वहीं अब इसके दाम गिरकर 100 रुपये प्रति बोरी से भी नीचे पहुंच गए हैं। यह कीमत लागत से भी काफी कम है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी मात्रा में प्याज खेतों और गोदामों में बिना बिके पड़ा है। प्याज एक जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए समय पर बिक्री न होने से नुकसान और बढ़ रहा है। कई किसान अपनी मेहनत की पूरी कमाई खोने की कगार पर हैं।
डॉ. सुधाकर ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार बाजार में हस्तक्षेप करे और किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करे, ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके और किसानों को राहत मिल सके।
प्याज किसानों का यह संकट सिर्फ एक राज्य या एक फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के कृषि तंत्र में मौजूद कमजोरियों को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता और बाजार में अस्थिरता से निपटने के लिए दीर्घकालिक नीति की जरूरत है।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ‘बैंगलोर रोज’ जैसे प्रीमियम उत्पाद भी किसानों के लिए घाटे का सौदा बन जाएंगे। ऐसे में सरकार की त्वरित कार्रवाई ही किसानों को इस आर्थिक संकट से उबार सकती है।

