संभावित अल नीनो (El Niño) परिस्थितियों और खरीफ 2026 सीजन की चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक में देशभर की कृषि तैयारियों का विस्तृत आकलन किया। बैठक में संभावित कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति, दालों में आत्मनिर्भरता, कपास उत्पादन बढ़ाने और उर्वरकों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम संबंधी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम पहले से उठाए जाएंगे।
अल नीनो की चुनौती से निपटने के लिए बनेगी विशेष रणनीति
बैठक के दौरान संभावित अल नीनो प्रभावों पर विशेष चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम या असमान वर्षा की संभावना है, उनकी पहले से पहचान की जाए और उनके लिए फसलवार आकस्मिक (कंटीजेंसी) योजनाएं तैयार की जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से ऐसे जिलों के लिए वैकल्पिक फसलें, कृषि सलाह और सहायता व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए ताकि मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों को नुकसान न हो। उन्होंने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतरवर्तीय खेती (इंटर-क्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल प्रणाली को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रत्येक जोखिम वाले जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
9-10 राज्यों में जिला स्तर पर होंगी विशेष बैठकें
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि जिन 9 से 10 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, वहां जिला स्तर पर विशेष बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
इन बैठकों में जिला मजिस्ट्रेट, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विस्तार तंत्र और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल होंगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों तक सही और वैज्ञानिक जानकारी समय पर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि किसानों के बीच डर या भ्रम फैलाने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित भरोसेमंद और समाधान-केंद्रित संदेश पहुंचाया जाना चाहिए। इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मौसम संबंधी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे।
कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश
बैठक में खरीफ 2026 के लिए फसलवार लक्ष्यों और बुवाई तैयारियों की समीक्षा के दौरान कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कपास की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिशन मोड में काम किया जाए। उन्होंने वैज्ञानिक खेती पद्धतियों, उन्नत किस्मों के चयन, अंतरवर्तीय खेती, मल्चिंग तकनीक और नमी संरक्षण उपायों को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाए तो कपास उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।
दालों में आत्मनिर्भर भारत बनाने पर सरकार का फोकस
बैठक का एक प्रमुख विषय दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भी रहा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में दालों की मांग को पूरा करने के लिए कुछ हद तक आयात पर निर्भरता बनी हुई है। सरकार इस निर्भरता को कम करने के लिए राज्यों के सहयोग से उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
इसके लिए खेती के रकबे का विस्तार, बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता, वैज्ञानिक तकनीकी मार्गदर्शन और फसल चक्र में सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मिशन न केवल आयात में कमी लाएगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उर्वरकों की उपलब्धता और बाजार स्थिति की समीक्षा
बैठक के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, मंडियों में कीमतों की स्थिति, जलाशयों में जल भंडारण और राज्यों में उपलब्ध स्टॉक की भी समीक्षा की गई।
कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और मानसून की प्रगति के साथ राज्यों एवं जिलों तक इसकी आपूर्ति को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी स्थानीय स्तर पर कमी की आशंका हो, वहां पहले से पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए ताकि किसानों को खेती के किसी भी चरण में उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े।
कृषि अनुसंधान और खेतों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक तकनीकों का वास्तविक महत्व तभी है जब उनका लाभ समय पर किसानों तक पहुंचे। इसलिए शोध संस्थानों और खेतों के बीच मजबूत संवाद और सूचना तंत्र विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों तक तकनीकी जानकारी सरल भाषा में और समय पर पहुंचाई जाए ताकि वे नई तकनीकों को आसानी से अपनाकर लाभ उठा सकें।
हर सप्ताह होगी समीक्षा बैठक
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए कृषि मंत्रालय नियमित निगरानी करेगा और हर सप्ताह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
इन बैठकों में खरीफ फसलों की स्थिति, वर्षा की प्रगति, उर्वरकों की उपलब्धता, राज्यों की तैयारियों और किसानों की समस्याओं की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि समय पर निर्णय और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से किसी भी संभावित संकट को नियंत्रित किया जा सकता है।
किसानों के हित सर्वोपरि
बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अल नीनो जैसी संभावित चुनौतियों के बावजूद सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को समय पर सलाह, संसाधन और सहायता उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना, राज्यों के साथ समन्वय, नियमित समीक्षा और किसानों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से खरीफ 2026 सीजन को सफल बनाया जाएगा। साथ ही दालों में आत्मनिर्भरता और कपास उत्पादन वृद्धि जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी हासिल करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी और मजबूत कृषि रणनीति से न केवल मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना किया जा सकेगा, बल्कि किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।

