देश में पोल्ट्री उद्योग के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण मक्का की मांग लगातार बढ़ रही है। पोल्ट्री फीड में मक्का एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है और इसकी गुणवत्ता तथा नियमित उपलब्धता पोल्ट्री उद्योग की लागत एवं उत्पादन क्षमता को सीधे प्रभावित करती है। इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए Poultry Federation of India (PFI) के अध्यक्ष रणपाल धांडा ने नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मक्का उत्पादन बढ़ाने और किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा पोल्ट्री उद्योग के बीच मजबूत बाजार संपर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन FMCAS India द्वारा नई दिल्ली स्थित Emarald Hotels & Resorts में किया गया। कार्यक्रम में कृषि, सहकारिता और कृषि-आधारित क्षेत्रों से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, इफको के चेयरमैन श्री दिलीप भाई सांघाणी तथा FMCAS India के चेयरमैन और NAFED के निदेशक श्री अशोक ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में Poultry Federation of India की ओर से अध्यक्ष रणपाल धांडा ने भाग लिया और देश के पोल्ट्री क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
गुणवत्तापूर्ण मक्का की बढ़ती मांग
अपने संबोधन में रणपाल धांडा ने कहा कि देश का पोल्ट्री सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है और इसके साथ पोल्ट्री फीड के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले मक्का की आवश्यकता भी बढ़ रही है। मक्का पोल्ट्री फीड का एक प्रमुख घटक है और इसकी गुणवत्ता का प्रभाव मुर्गियों के पोषण, उत्पादन क्षमता और अंततः पोल्ट्री उत्पादों की लागत पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पोल्ट्री उद्योग के सामने केवल मक्का की मात्रा उपलब्ध कराने की चुनौती नहीं है, बल्कि अच्छी गुणवत्ता वाले मक्का की लगातार और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने तथा बेहतर उत्पादन तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
रणपाल धांडा ने विशेष रूप से अच्छी गुणवत्ता वाले मक्का बीज की सीमित उपलब्धता को एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में रेखांकित किया। उनका कहना था कि यदि किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की सुनिश्चितता उपलब्ध कराई जाए, तो देश में मक्का उत्पादन की क्षमता को काफी बढ़ाया जा सकता है।
पूर्वी भारत में मक्का उत्पादन की बड़ी संभावना
PFI अध्यक्ष ने पूर्वी भारत को मक्का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पूर्वी भारत में लगभग 11–12 मिलियन हेक्टेयर धान की परती भूमि उपलब्ध है। यदि इस भूमि के एक हिस्से का उपयोग रबी या स्प्रिंग सीजन में मक्का की खेती के लिए किया जाए, तो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिरिक्त मक्का उत्पादन किया जा सकता है।
उनके अनुसार, यदि उपलब्ध धान परती भूमि के एक हिस्से को वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से मक्का उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो पूर्वी भारत से लगभग 25–30 मिलियन टन अतिरिक्त मक्का उत्पादन की संभावना बन सकती है।
यह संभावना केवल मक्का उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे पूर्वी भारत के किसानों को एक अतिरिक्त फसल और अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। साथ ही, देश के पोल्ट्री उद्योग के लिए घरेलू स्तर पर मक्का की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
धान के बाद परती भूमि का बेहतर उपयोग
पूर्वी भारत के कई हिस्सों में धान की खेती के बाद बड़ी मात्रा में भूमि रबी मौसम में खाली रह जाती है। ऐसी भूमि का उपयोग मक्का जैसी फसल के लिए किया जाए तो किसानों की फसल तीव्रता और प्रति हेक्टेयर आय बढ़ाने की संभावना है।
हालांकि, इसके लिए स्थानीय जलवायु, मिट्टी की स्थिति, सिंचाई की उपलब्धता, उपयुक्त किस्मों और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीति तैयार करना जरूरी होगा।
रबी और स्प्रिंग मक्का के विस्तार से किसानों को धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और अपनी कृषि प्रणाली में विविधता लाने का अवसर भी मिल सकता है। यदि उत्पादन के साथ-साथ बाजार की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित हो, तो किसान अधिक आत्मविश्वास के साथ मक्का की खेती को अपना सकते हैं।
FPOs बन सकते हैं किसानों और पोल्ट्री उद्योग के बीच कड़ी
रणपाल धांधा ने अपने संबोधन में Farmer Producer Organisations (FPOs) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि FPOs अच्छी गुणवत्ता वाले मक्का का उत्पादन और संग्रहण कर उसे संगठित तरीके से बाजार तक पहुंचाते हैं, तो वे किसानों और पोल्ट्री सेक्टर के बीच एक मजबूत कड़ी का काम कर सकते हैं।
उन्होंने इस दिशा में एक प्रत्यक्ष बाजार मॉडल की संभावना पर जोर दिया। उनके अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाला मक्का उत्पादित करने वाले FPOs सीधे पोल्ट्री उद्योग से जुड़ सकते हैं। गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने पर पोल्ट्री सेक्टर ऐसे FPOs के माध्यम से किसानों द्वारा उत्पादित पूरी मात्रा के गुणवत्तापूर्ण मक्का की खरीद कर सकता है।
ऐसी व्यवस्था से किसानों को बाजार खोजने की समस्या कम हो सकती है। वहीं, पोल्ट्री उद्योग को भी एक संगठित स्रोत से गुणवत्तापूर्ण मक्का की नियमित आपूर्ति प्राप्त हो सकती है।
किसानों के लिए भरोसेमंद बाजार का अवसर
भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को उनकी उपज का उचित और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराना भी एक बड़ी चुनौती है। मक्का के मामले में FPO आधारित खरीद व्यवस्था इस समस्या को काफी हद तक दूर करने में मदद कर सकती है।
यदि FPOs किसानों से मक्का एकत्र करके उसकी गुणवत्ता की जांच, ग्रेडिंग, भंडारण और सामूहिक बिक्री की व्यवस्था करते हैं, तो छोटे और सीमांत किसान भी बड़े खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं।
पोल्ट्री सेक्टर के साथ सीधी कड़ी बनने से किसानों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकती है कि किस गुणवत्ता का मक्का बाजार में अधिक मांग में है। इससे किसान केवल उत्पादन की मात्रा पर ध्यान देने के बजाय गुणवत्ता आधारित उत्पादन की ओर भी बढ़ सकते हैं।
पोल्ट्री उद्योग को भी मिलेगा फायदा
इस मॉडल का लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। पोल्ट्री उद्योग के लिए भी गुणवत्तापूर्ण मक्का की स्थिर आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है।
यदि पोल्ट्री कंपनियां या उद्योग संगठित FPOs के साथ सीधे जुड़ते हैं, तो उन्हें अलग-अलग बाजारों से मक्का खरीदने की आवश्यकता कम हो सकती है। एक संगठित सप्लाई नेटवर्क के माध्यम से गुणवत्ता, मात्रा और आपूर्ति की निरंतरता को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।
इससे पोल्ट्री फीड निर्माण से जुड़ी कंपनियों को कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर अधिक निश्चितता मिल सकती है। साथ ही, किसानों के साथ दीर्घकालिक संबंध विकसित होने की संभावना भी बढ़ेगी।
गुणवत्ता मानकों पर देना होगा विशेष ध्यान
हालांकि, किसान-FPO-पोल्ट्री उद्योग के बीच सीधी खरीद व्यवस्था को सफल बनाने के लिए गुणवत्ता मानकों का पालन महत्वपूर्ण होगा। मक्का में नमी, भंडारण की स्थिति, टूटे हुए दाने, अशुद्धियां तथा अन्य गुणवत्ता मानक खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए FPOs को केवल किसानों से उपज एकत्र करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, सुखाने, भंडारण और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करना होगा।
किसानों को भी बेहतर बीज, संतुलित पोषण, कीट एवं रोग प्रबंधन, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण देना आवश्यक होगा। इससे उत्पादन के साथ-साथ मक्का की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता जरूरी
रणपाल धांधा द्वारा उठाया गया गुणवत्तापूर्ण मक्का बीज का मुद्दा इस पूरी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उच्च उत्पादकता और बेहतर गुणवत्ता वाली मक्का किस्मों तक किसानों की पहुंच बढ़ाना जरूरी है।
यदि पूर्वी भारत में धान की परती भूमि पर बड़े पैमाने पर रबी और स्प्रिंग मक्का का विस्तार किया जाना है, तो किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी साथ-साथ विकसित करनी होगी।
इसके अलावा, किसानों को केवल बीज उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें फसल प्रबंधन, सिंचाई, पोषण और कटाई के बाद प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
कृषि और पोल्ट्री वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा
कार्यक्रम में PFI की भागीदारी ने कृषि और पोल्ट्री सेक्टर के बीच संभावित सहयोग को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। भारत में मक्का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत और पोल्ट्री उद्योग की बढ़ती मांग एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं।
एक ओर किसानों के पास उत्पादन बढ़ाने की क्षमता है, वहीं दूसरी ओर पोल्ट्री उद्योग को लगातार गुणवत्तापूर्ण मक्का की जरूरत है। FPOs इस अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि किसानों को बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने, FPOs को संगठित खरीद एवं आपूर्ति की क्षमता विकसित करने और पोल्ट्री उद्योग को किसानों के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है, तो इससे पूरी वैल्यू चेन अधिक प्रभावी बन सकती है।
पूर्वी भारत के लिए रोजगार और आय के नए अवसर
मक्का उत्पादन में संभावित विस्तार से पूर्वी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। अतिरिक्त फसल उत्पादन से कृषि मजदूरी, परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
FPOs के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से बाजार से जोड़ने से ग्रामीण स्तर पर कृषि व्यवसाय को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे किसान केवल कच्चे कृषि उत्पाद के उत्पादक न रहकर मूल्य श्रृंखला के अधिक संगठित हिस्से में शामिल हो सकते हैं।
किसान-FPO-पोल्ट्री सेक्टर के बीच सहयोग पर जोर
कार्यक्रम में रणपाल धांधा द्वारा दिए गए सुझावों का प्रमुख संदेश यही रहा कि देश में मक्का उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल किसानों के उत्पादन को बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए बीज, तकनीक, गुणवत्ता, बाजार और खरीदार के बीच एक मजबूत और संगठित व्यवस्था विकसित करनी होगी।
FPOs इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे किसानों को संगठित कर सकते हैं, गुणवत्तापूर्ण इनपुट तक पहुंच दिला सकते हैं, उत्पादन को एकत्र कर सकते हैं और बड़े खरीदारों के साथ सामूहिक रूप से बातचीत कर सकते हैं।
दूसरी ओर, पोल्ट्री उद्योग किसानों और FPOs के साथ सीधे जुड़कर अपनी कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति संबंध विकसित कर सकता है।
भारत की मक्का अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर
भारत में पोल्ट्री सेक्टर की बढ़ती मांग और पूर्वी भारत में उपलब्ध धान परती भूमि को देखते हुए मक्का उत्पादन में विस्तार की बड़ी संभावना दिखाई देती है। यदि लगभग 11–12 मिलियन हेक्टेयर उपलब्ध भूमि में से एक हिस्से को भी रबी और स्प्रिंग मक्का के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाता है, तो 25–30 मिलियन टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना कृषि और पोल्ट्री दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन, किसान प्रशिक्षण, कटाई के बाद प्रबंधन और सबसे महत्वपूर्ण सुनिश्चित बाजार की आवश्यकता होगी।
नई दिल्ली में आयोजित FMCAS India के कार्यक्रम में PFI की भागीदारी ने इस बात को सामने रखा कि किसानों और पोल्ट्री उद्योग के हित कई स्तरों पर एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि दोनों क्षेत्रों के बीच FPOs के माध्यम से सीधा और व्यवस्थित संबंध विकसित किया जाता है, तो इससे किसानों को भरोसेमंद बाजार और पोल्ट्री उद्योग को गुणवत्तापूर्ण मक्का की नियमित आपूर्ति मिल सकती है।
ऐसे प्रयास भारत की मक्का और पोल्ट्री वैल्यू चेन को मजबूत करने, किसानों की आय के अवसर बढ़ाने और घरेलू स्तर पर गुणवत्तापूर्ण फीड की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

