केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 13 और 14 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी के साथ कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। साथ ही जूट किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी जानेंगे।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दे रही है। इस यात्रा का उद्देश्य केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना तथा किसानों और ग्रामीण समुदाय तक सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए रणनीति तैयार करना है।
मुख्यमंत्री के साथ होगी अहम बैठक
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 13 जुलाई की शाम कोलकाता पहुंचेंगे और सीधे मुख्यमंत्री आवास जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी के साथ रात्रिभोज के दौरान महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में कृषि, किसानों के कल्याण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, रोजगार, आवास और सड़क निर्माण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करना है।
14 जुलाई को सचिवालय में होगी हाई लेवल समीक्षा
दौरे के दूसरे दिन 14 जुलाई को कोलकाता के नए सचिवालय भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधि तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
केंद्र सरकार की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधिकारी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतिकरण देंगे।
बैठक में जिन प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की जाएगी, उनमें शामिल हैं—
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- प्रधानमंत्री कृषि धन-धान्य योजना
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था
- विकसित भारत-जी राम जी अभियान
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
- प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना
- पंचायतों को मिलने वाले केंद्रीय वित्तीय सहायता एवं विकास कार्य
इन योजनाओं के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति, राज्य में आने वाली चुनौतियों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा होगी।
कृषि विकास को मिलेगा नया रोडमैप
बैठक के दौरान कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर भी विशेष मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण तथा डिजिटल कृषि सेवाओं को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य के बीच इस तरह की समन्वय बैठकें योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा किसानों तक सरकारी लाभ तेजी से पहुंचाने में मददगार साबित होती हैं।
जूट किसानों से करेंगे सीधा संवाद
दोपहर बाद केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान बैरकपुर स्थित आईसीएआर-केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRIJAF) पहुंचेंगे। यहां वे पश्चिम बंगाल के जूट उत्पादक किसानों से सीधे बातचीत करेंगे और खेती से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझेंगे।
संवाद के दौरान किसान जूट की खेती में आने वाली प्रमुख चुनौतियों जैसे—
- रेटिंग (Retting) की समस्या
- पर्याप्त पानी की उपलब्धता
- रोग एवं कीट प्रबंधन
- बढ़ती उत्पादन लागत
- बाजार में उचित मूल्य
- विपणन व्यवस्था
जैसे विषयों पर अपनी बात रखेंगे।
केंद्रीय मंत्री किसानों से सुझाव भी प्राप्त करेंगे कि जूट क्षेत्र को और अधिक लाभकारी कैसे बनाया जाए तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।
वैज्ञानिक देंगे आधुनिक तकनीकों की जानकारी
आईसीएआर-सीआरआईजैफ के वैज्ञानिक इस अवसर पर किसानों को जूट की उन्नत किस्मों, आधुनिक रेटिंग तकनीक, जल संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन तथा प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी देंगे।
विशेषज्ञ किसानों को यह भी बताएंगे कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करते हुए बेहतर गुणवत्ता का जूट कैसे तैयार किया जा सकता है।
लखपति दीदियों और स्वयं सहायता समूहों से भी मिलेंगे
केंद्रीय मंत्री स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं और ‘लखपति दीदियों’ से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान महिलाओं को जूट आधारित उत्पादों के निर्माण, मूल्य संवर्धन (Value Addition), पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के बारे में जानकारी दी जाएगी।
महिलाओं को छोटे स्तर पर जूट आधारित उद्यम स्थापित करने, स्वरोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उपायों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना तथा स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाना है।
जूट उद्योग को मिलेगा नया प्रोत्साहन
पश्चिम बंगाल देश का सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य है। यहां लाखों किसान और मजदूर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जूट उद्योग से जुड़े हुए हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री का यह दौरा जूट क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जूट की आधुनिक खेती, बेहतर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और मजबूत विपणन व्यवस्था पर प्रभावी ढंग से कार्य किया जाता है तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक फाइबर होने के कारण वैश्विक बाजार में भारतीय जूट उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
कृषि और ग्रामीण विकास पर केंद्र का विशेष फोकस
दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के माध्यम से केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि कृषि और ग्रामीण विकास उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। मुख्यमंत्री के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और किसानों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के जरिए सरकार योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करेगी तथा आवश्यक सुधारों पर निर्णय लेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दौरे के दौरान लिए गए निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो पश्चिम बंगाल में कृषि उत्पादन, जूट उद्योग, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिल सकते हैं। साथ ही केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलने की भी उम्मीद है।

