UP Dhan Kharid: उत्तर प्रदेश के लाखों धान उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 1 नवंबर 2026 से धान की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है। सरकार ने इस बार सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में दोनों श्रेणियों के समर्थन मूल्य में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
UP Dhan Kharid 2026-27 के तहत किसानों को केवल बढ़े हुए समर्थन मूल्य का लाभ ही नहीं मिलेगा, बल्कि खरीद केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, समय पर तौल कराने और सीधे बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
30 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धान बेचने आने वाले किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। खरीद केंद्रों पर पीने का पानी, छाया, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। हालांकि, किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि 1 नवंबर से पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ खरीद शुरू नहीं हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद 12 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के कुछ जिलों में खरीद 1 नवंबर से प्रारंभ होगी।
UP Dhan Kharid 2026-27: कब से कब तक होगी धान की सरकारी खरीद?
धान की कटाई का समय अलग-अलग क्षेत्रों में बदलता है। इसी वजह से प्रदेश सरकार ने सरकारी खरीद के लिए क्षेत्रवार तारीखें निर्धारित की हैं।
| क्षेत्र | खरीद शुरू | अंतिम तारीख |
|---|---|---|
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश | 12 अक्टूबर 2026 | 15 फरवरी 2027 |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | 1 नवंबर 2026 | 28 फरवरी 2027 |
| लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव | 1 नवंबर 2026 | 28 फरवरी 2027 |
सरकार की इस व्यवस्था से किसानों को अपनी फसल की कटाई, सुखाई और बिक्री की तैयारी के लिए समय मिलेगा। लेकिन जिन किसानों की धान कटाई पूरी हो चुकी है, उन्हें पंजीकरण और खरीद केंद्र की जानकारी लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
किन जिलों में 1 नवंबर से शुरू होगी Paddy Procurement?
UP Paddy Procurement 2026-27 के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर और प्रयागराज मंडलों में धान खरीद शुरू होगी।इसके अतिरिक्त लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जिलों में भी 1 नवंबर से सरकारी खरीद शुरू होने की व्यवस्था की गई है।किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने जिले के निर्धारित खरीद केंद्र, खरीद की तारीख और पंजीकरण की स्थिति की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। इससे धान लेकर केंद्र पहुंचने पर अनावश्यक प्रतीक्षा से बचा जा सकता है।
Paddy MSP 2026: सामान्य और ग्रेड-ए धान का नया समर्थन मूल्य
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब धान की खेती करने वाले किसानों को मजदूरी, सिंचाई, मशीनों, उर्वरक और परिवहन जैसी लागतों का सामना करना पड़ रहा है।
| धान की श्रेणी | MSP 2025-26 | MSP 2026-27 | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| सामान्य धान (Common Paddy) | ₹2,369 | ₹2,441 | ₹72 |
| ग्रेड-ए धान (Grade-A Paddy) | ₹2,389 | ₹2,461 | ₹72 |
सभी दरें रुपये प्रति क्विंटल में। स्रोत: भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय। इसका अर्थ है कि यदि किसान का धान निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार खरीद के लिए स्वीकार किया जाता है, तो उसे संबंधित श्रेणी का MSP मिलेगा।यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए। सभी किसानों को 2,461 रुपये प्रति क्विंटल नहीं मिलेंगे। यह दर केवल ग्रेड-ए श्रेणी के धान के लिए है। सामान्य धान का समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
किसानों की कमाई में कितना अंतर आएगा?
मान लीजिए, किसी किसान के पास बिक्री के लिए 100 क्विंटल सामान्य धान है। यदि उसकी पूरी उपज सरकारी खरीद केंद्र पर स्वीकार हो जाती है, तो इस बार उसे MSP के आधार पर 2,44,100 रुपये मिलेंगे।
पिछले वर्ष समान मात्रा पर यह रकम 2,36,900 रुपये बनती थी। इस प्रकार किसान को केवल समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी के कारण 7,200 रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे। वहीं 100 क्विंटल ग्रेड-ए धान की बिक्री पर 2,46,100 रुपये का MSP बनता है। हालांकि, यह रकम बिक्री का सकल मूल्य है, खेती का शुद्ध मुनाफा नहीं। वास्तविक लाभ जानने के लिए किसान को बीज, खाद, सिंचाई, कटाई, मजदूरी और परिवहन सहित कुल लागत घटानी होगी।
65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य, 4,195 केंद्र तैयार
उत्तर प्रदेश सरकार ने UP Dhan Kharid के लिए 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आठ खरीद एजेंसियों के माध्यम से लगभग 4,500 क्रय केंद्र संचालित करने की योजना है। 30 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 4,195 खरीद केंद्र खोले जा चुके थे। पिछले खरीफ विपणन वर्ष में लगभग 62 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद हुई थी। इस बार सरकार का लक्ष्य पिछले सत्र से करीब तीन लाख मीट्रिक टन अधिक है।
इसके अलावा 38 हजार से अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीकरण भी करा लिया था। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं। विशेष रूप से उन गांवों के किसानों को सुविधा होगी, जिन्हें पहले धान बेचने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि खरीद केंद्रों पर तौल, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था कितनी सुचारु रहती है।
किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे
इस बार Paddy Procurement से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था उतराई, छनाई और सफाई के खर्च की है।प्रदेश सरकार की घोषित व्यवस्था के अनुसार, किसानों को धान की उतराई, छनाई और सफाई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से दिए जाएंगे।
उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान 50 क्विंटल सामान्य धान बेचता है, तो उसे MSP के रूप में 1,22,050 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा निर्धारित प्रावधान के अनुसार 1,000 रुपये उतराई, छनाई और सफाई के मद में बनेंगे। इस तरह कुल राशि 1,23,050 रुपये हो सकती है, बशर्ते पूरी मात्रा स्वीकार की जाए और अतिरिक्त भुगतान की शर्तें पूरी हों।
UP Dhan Kharid Registration: किसान ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें?
सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने के इच्छुक किसानों के लिए पंजीकरण एक जरूरी प्रक्रिया है। किसान उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग की आधिकारिक वेबसाइट fcs.up.gov.in के माध्यम से अपना पंजीकरण या नवीनीकरण करा सकते हैं।
इसके अलावा UP Kisan Mitra के माध्यम से भी पंजीकरण और नवीनीकरण की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। पंजीकरण की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
-
खाद्य एवं रसद विभाग की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
-
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के किसान पंजीकरण संबंधी विकल्प पर जाएं।
-
नए किसान पंजीकरण करें और पहले से पंजीकृत किसान आवश्यकतानुसार नवीनीकरण करें।
-
पोर्टल पर मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण और बैंक खाते का विवरण भरें।
-
उपलब्ध सत्यापन प्रक्रिया पूरी करके आवेदन जमा करें।
-
पंजीकरण की रसीद या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
पोर्टल की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार कुछ चरण अलग हो सकते हैं। यदि किसान स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, तो वे नजदीकी जनसेवा केंद्र से मदद ले सकते हैं।
धान बेचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज तैयार रखें?
सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी करने के लिए किसानों को अपनी पहचान, खेती की जमीन और बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। आमतौर पर निम्न दस्तावेज उपयोगी होते हैं:
-
आधार कार्ड और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर।
-
बैंक पासबुक या सही बैंक खाता विवरण।
-
भूमि की खतौनी और संबंधित राजस्व विवरण।
-
किसान पंजीकरण संख्या या आवेदन की रसीद।
-
बटाईदार अथवा अन्य विशेष श्रेणी के आवेदकों के लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज।
किसानों को ध्यान देना चाहिए कि बैंक खाते में दर्ज नाम और पंजीकरण के विवरण में गलती होने पर भुगतान में देरी हो सकती है।
धान का भुगतान 48 घंटे में करने के निर्देश
UP Paddy Procurement 2026-27 की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में किसानों को समय पर भुगतान करना शामिल है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी खरीद केंद्र पर धान खरीदने के बाद किसानों को 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में भुगतान सुनिश्चित किया जाए।इसके लिए Direct Benefit Transfer (DBT) व्यवस्था का उपयोग किया जाएगा। खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन रखने का उद्देश्य बिचौलियों के हस्तक्षेप को कम करना और लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाना है।हालांकि, 48 घंटे में भुगतान करने का सरकारी निर्देश और प्रत्येक किसान के खाते में वास्तविक भुगतान पहुंचने का समय अलग हो सकता है। यदि भुगतान में देरी होती है, तो किसान अपनी खरीद रसीद और पंजीकरण विवरण के साथ संबंधित अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
धान की गुणवत्ता खराब हुई तो MSP मिलने में आ सकती है परेशानी
धान की सरकारी खरीद में केवल फसल की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।कई बार किसान कटाई के तुरंत बाद बिना पर्याप्त सुखाए धान खरीद केंद्र पर ले जाते हैं। इससे अधिक नमी, मिट्टी, भूसी या अन्य अशुद्धियों के कारण गुणवत्ता जांच में परेशानी आ सकती है।किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए।धान की नमी पर ध्यान दें: सरकारी खरीद में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी है। सामान्यतः धान के लिए अधिकतम 17 प्रतिशत नमी का मानक लागू होता है, हालांकि किसी भी स्थानीय छूट या संशोधित मानक की पुष्टि खरीद केंद्र से करनी चाहिए।
साफ धान लेकर जाएं: धान में मिट्टी, पत्थर, भूसी और दूसरी अशुद्धियां कम से कम हों। इससे गुणवत्ता जांच और तौल की प्रक्रिया आसान हो सकती है।बारिश से फसल बचाएं: कटाई के बाद धान को खुले में बारिश या लगातार नमी के संपर्क में न रहने दें। भंडारण के लिए सूखी और साफ जगह का उपयोग करें।वजन और रसीद जांचें: खरीद केंद्र पर तौल पूरी होने के बाद किसान अपनी रसीद में दर्ज मात्रा, श्रेणी और अन्य विवरण जरूर देख लें।
मंडी में बेचें या सरकारी खरीद केंद्र पर? किसान कैसे करें फैसला
धान की बिक्री के समय किसानों के सामने यह सवाल भी आता है कि फसल स्थानीय व्यापारी को बेचना बेहतर रहेगा या सरकारी खरीद केंद्र पर।इसका जवाब केवल मंडी के भाव से नहीं, बल्कि कुल बिक्री खर्च और भुगतान की स्थिति से तय होता है। मान लीजिए, किसी क्षेत्र में व्यापारी सामान्य धान के लिए 2,300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रहा है, जबकि सरकारी MSP 2,441 रुपये है।
ऐसे में सरकारी खरीद केंद्र का भाव 141 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। यदि किसान 80 क्विंटल धान बेचता है, तो सकल मूल्य का अंतर 11,280 रुपये होगा।लेकिन किसान को परिवहन, तौल केंद्र तक दूरी, श्रमिक खर्च और भुगतान मिलने के समय का भी आकलन करना चाहिए। यह उदाहरण केवल गणना समझाने के लिए है। स्थानीय मंडी का वास्तविक भाव अलग हो सकता है।
छोटे किसानों को सरकारी खरीद का कितना लाभ मिलेगा?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जिनके पास सीमित कृषि भूमि है और जो अपनी फसल का कुछ हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित रखते हैं। छोटे किसानों के लिए MSP पर धान बिक्री का एक बड़ा फायदा यह है कि उन्हें अपनी उपज के लिए निर्धारित सरकारी मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलता है। हालांकि, छोटे किसान कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करते हैं। इनमें खरीद केंद्र तक धान पहुंचाना, पर्याप्त मात्रा इकट्ठा करना, ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना और निर्धारित गुणवत्ता बनाए रखना शामिल है।
ऐसे किसानों के लिए गांव में पहले से परिवहन की व्यवस्था बनाना उपयोगी हो सकता है। किसान उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़े किसानों को भी सामूहिक जानकारी और परिवहन समन्वय में सहायता मिल सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि किसान अपनी फसल बेचने का फैसला सही जानकारी के आधार पर करें और खरीद से संबंधित रसीद अवश्य प्राप्त करें।
धान खरीद में समस्या होने पर कहां शिकायत करें?
यदि किसान को खरीद केंद्र पर तौल नहीं होने, पंजीकरण संबंधी समस्या, भुगतान में देरी या खरीद प्रक्रिया से जुड़ी अन्य परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो वह खाद्य एवं रसद विभाग की हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है। धान खरीद के लिए किसानों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। 1800-180-0150 साथ ही किसान शिकायत करते समय अपना जिला, खरीद केंद्र का नाम, किसान पंजीकरण संख्या और समस्या का विवरण तैयार रखें।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है इस बार की धान खरीद?
UP Dhan Kharid 2026-27 केवल सरकारी खरीद का वार्षिक कार्यक्रम नहीं है। यह धान उत्पादक किसानों की आय, ग्रामीण बाजारों और अगले कृषि सीजन की तैयारी से भी जुड़ा हुआ है। धान बेचने के बाद मिलने वाली राशि का उपयोग किसान गेहूं, चना, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई के लिए करते हैं। इसलिए खरीद और भुगतान में देरी होने पर किसानों की अगली फसल की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं। समय पर भुगतान मिलने से किसानों को बीज, उर्वरक, कृषि मशीनरी और सिंचाई के खर्चों की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है।
इस बार सरकारी खरीद के बड़े लक्ष्य, बढ़े हुए MSP और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था से किसानों को बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। लेकिन इसकी सफलता के लिए खरीद केंद्रों पर व्यवस्था मजबूत रहना और किसानों की शिकायतों का समय पर समाधान होना जरूरी है।
धान बेचने से पहले ये तैयारी जरूर करें किसान
उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीद पूर्वांचल और मध्य यूपी के कई जिलों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इस बार सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल MSP निर्धारित किया गया है। इसके साथ 20 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त व्यवस्था और 48 घंटे के भीतर भुगतान के निर्देश किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
किसानों को सलाह है कि वे समय रहते पंजीकरण पूरा करें, धान की नमी और गुणवत्ता का ध्यान रखें तथा सरकारी खरीद केंद्र पर मिलने वाली रसीद सुरक्षित रखें। सही तैयारी से फसल बेचने की प्रक्रिया आसान हो सकती है और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।
