उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बुधवार से दो दिवसीय यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में प्रदेशभर से आए पशुपालक, बकरी एवं भेड़ पालक, कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी, स्टार्टअप कंपनियां और पशुधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। कॉन्क्लेव का उद्देश्य लघु पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देना, पशुपालकों की आय बढ़ाना तथा आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के पहले ही दिन पशुपालकों और आगंतुकों में काफी उत्साह देखने को मिला। विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और पशुपालन के क्षेत्र में उभर रही नई संभावनाओं पर चर्चा की। कॉन्क्लेव में लगी प्रदर्शनी और तकनीकी स्टॉल लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
पशुपालन को आय और रोजगार का मजबूत आधार बनाने पर मंथन
यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि लघु पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बकरी, भेड़ और अन्य छोटे पशुओं का पालन सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम में पशुपालन आधारित उद्यमिता, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों, पशु स्वास्थ्य, पोषण और विपणन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जाए तो छोटे स्तर पर पशुपालन भी किसानों को अच्छी आमदनी दिला सकता है।
5 लाख रुपये के बकरे ‘युवराज’ ने खींचा लोगों का ध्यान
कॉन्क्लेव में सबसे अधिक चर्चा का विषय इटावा जिले के नीमडांडा गांव से आए पशुपालक शिव कुमार यादव और उनका जमुनापारी नस्ल का बकरा ‘युवराज’ रहा। लगभग 5 लाख रुपये कीमत वाले इस बकरे को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती रही।
शिव कुमार यादव ने बताया कि युवराज केवल एक सामान्य बकरा नहीं है, बल्कि इसे विशेष रूप से प्रजनन कार्यक्रमों के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि वे बकरे के सीमन और प्रजनन सेवाओं के माध्यम से अच्छी आय अर्जित करते हैं।
उनके अनुसार यदि कोई पशुपालक वैज्ञानिक पद्धति से केवल 4 से 5 बकरियों का पालन करता है तो वह सालाना 3 से 4 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता है। उन्होंने बताया कि बकरी पालन कम लागत वाला व्यवसाय है, जिसमें उचित प्रबंधन और नस्ल सुधार के माध्यम से बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
युवराज की शानदार कद-काठी, बेहतर नस्लीय विशेषताओं और ऊंची कीमत ने कॉन्क्लेव में आने वाले लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कई पशुपालक उसके पालन-पोषण और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी लेने में रुचि दिखाते नजर आए।
आधुनिक तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन
कॉन्क्लेव में विभिन्न संस्थानों और कंपनियों द्वारा आधुनिक तकनीकों और उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। पशुपालन क्षेत्र में उपयोगी नई मशीनें, पशु आहार, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रजनन तकनीकें और डिजिटल समाधान लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और पशुपालकों की लागत को कम किया जा सकता है। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से पशुपालन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में स्टार्टअप कंपनियां भी अपने नवाचार प्रस्तुत कर रही हैं। युवा उद्यमी पशुपालन क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं, पोषण प्रबंधन और आधुनिक फार्मिंग मॉडल से जुड़े समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं, जिन्हें पशुपालकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
हाइड्रोपोनिक हरे चारे की तकनीक बनी आकर्षण का केंद्र
कॉन्क्लेव में प्रदर्शित तकनीकों में हाइड्रोपोनिक हरा चारा भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शून्य फोडर एंड एनिमल न्यूट्रिशन कंपनी द्वारा लगाए गए स्टॉल पर बड़ी संख्या में पशुपालक जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि हाइड्रोपोनिक तकनीक के माध्यम से बिना मिट्टी और बिना रासायनिक उपयोग के नियंत्रित वातावरण में उच्च गुणवत्ता वाला हरा चारा तैयार किया जाता है। यह चारा पोषक तत्वों से भरपूर होता है और पशुओं की सेहत तथा उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस चारे में 18 से 22 प्रतिशत तक प्रोटीन, लगभग 85 प्रतिशत पाचन क्षमता तथा पर्याप्त मात्रा में विटामिन और एंजाइम मौजूद होते हैं। इसके अलावा यह तकनीक वर्षभर एक समान गुणवत्ता वाला चारा उपलब्ध कराने में सक्षम है, जिससे पशुपालकों को मौसम पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
भविष्य की कार्ययोजना पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (पशुधन एवं दुग्ध विकास) मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि लघु पशुपालन क्षेत्र के लिए भविष्य की ठोस कार्ययोजना तैयार करना भी है।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लघु पशुपालन क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार और संबंधित संस्थान मिलकर इस क्षेत्र में निवेश, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में लघु पशुधन का भविष्य, पोषण सुरक्षा में इसकी भूमिका, स्टार्टअप एवं निवेश के अवसर, तकनीकी आधुनिकीकरण और उद्यमिता विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
किसानों और उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का मंच
यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026 पशुपालकों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। इस आयोजन के माध्यम से पशुपालकों को नई तकनीकों, बेहतर नस्लों, आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों और व्यवसायिक अवसरों की जानकारी मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशुपालक वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें तो लघु पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार का एक मजबूत स्रोत बन सकता है। कॉन्क्लेव न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि पशुपालन क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
युवराज जैसे उच्च गुणवत्ता वाले बकरों से लेकर हाइड्रोपोनिक चारे जैसी आधुनिक तकनीकों तक, यह आयोजन स्पष्ट संकेत देता है कि भारत में लघु पशुपालन क्षेत्र तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

