• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

यूरिया आयात की कीमतों में 10% गिरावट, किसानों को मिलेगी राहत?

भारत के यूरिया आयात टेंडर में कीमतें करीब 10% कम होने के संकेत मिले हैं। जानें रबी सीजन, किसानों और उर्वरक सब्सिडी पर इसका क्या असर हो सकता है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 12, 2026
in कृषि समाचार
0
भारत के यूरिया आयात टेंडर में कीमतों में गिरावट और उर्वरक आपूर्ति
0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में यूरिया आयात की कीमतों में गिरावट के संकेत मिले हैं। हाल ही में आयोजित यूरिया आयात टेंडर में कंपनियों ने अगस्त में हुई खरीद की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक कम कीमत पर आपूर्ति के प्रस्ताव दिए हैं। इससे बढ़ती कृषि लागत से जूझ रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, यूरिया आयात पर होने वाले सरकारी खर्च और उर्वरक सब्सिडी के दबाव में भी कमी आने की संभावना है।

भारत दुनिया के प्रमुख उर्वरक आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में देश में यूरिया आयात के लिए मिलने वाली कीमतों पर दूसरे आयातक देशों की भी नजर रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर खेती की लागत और उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।

आयात टेंडर में क्या मिली कीमतें?

सरकार की ओर से यूरिया आयात करने वाली कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को हालिया टेंडर में पश्चिमी तट के लिए 356.25 से 416.50 डॉलर प्रति टन तक के प्रस्ताव मिले। वहीं, पूर्वी तट पर आपूर्ति के लिए 352.10 से 465 डॉलर प्रति टन तक की कीमतों की पेशकश की गई।

टेंडर से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में कंपनियों की ओर से प्रस्तावित कुल मात्रा भारत की ओर से मांगी गई मात्रा से दोगुने से भी अधिक थी। इससे आयात के लिए पर्याप्त प्रस्ताव मिलने का संकेत मिलता है।

इससे पहले अगस्त में आयोजित टेंडर के दौरान भारत ने 390.25 से 393.65 डॉलर प्रति टन की दर पर यूरिया खरीदा था। इस लिहाज से नए टेंडर में कुछ प्रस्ताव अगस्त की खरीद कीमतों से काफी नीचे हैं। हालांकि, अलग-अलग प्रस्तावों की तुलना करते समय आपूर्ति स्थान, मात्रा और अन्य शर्तों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों गिरी यूरिया की कीमत?

इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में युद्ध शुरू होने के दौरान भारत को यूरिया के लिए अधिकतम 959 डॉलर प्रति टन तक की कीमत चुकानी पड़ी थी।

मध्य पूर्व क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर संघर्ष के असर के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी। इसके बाद आपूर्ति संबंधी बाधाएं कम होने और वैश्विक मांग कमजोर पड़ने से कीमतों में गिरावट आई।

यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि कम कीमतों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध होता है, तो आयातकों को खरीद लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का आगे का रुख आपूर्ति, मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

रबी सीजन में बढ़ेगी यूरिया की मांग

भारत में आने वाले रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों और चने जैसी फसलों की बुवाई होती है। इन फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए संतुलित पोषण जरूरी है। यूरिया नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है, जिसका इस्तेमाल फसलों में पौधों की वृद्धि और हरित भागों के विकास के लिए किया जाता है।

बुवाई के मौसम में किसानों की ओर से उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें कम होना आयात व्यवस्था के लिए राहत देने वाला संकेत हो सकता है।

हालांकि, किसानों को यूरिया का इस्तेमाल फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। केवल कीमत कम होने के कारण जरूरत से ज्यादा उर्वरक का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

सरकारी उर्वरक सब्सिडी पर भी पड़ सकता है असर

भारत में किसानों को यूरिया नियंत्रित खुदरा कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। इसकी वास्तविक उत्पादन या आयात लागत और किसानों से मिलने वाली कीमत के बीच के अंतर की भरपाई सरकारी सब्सिडी व्यवस्था के माध्यम से की जाती है।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयात कीमतों में गिरावट आने से सरकार पर पड़ने वाले उर्वरक सब्सिडी के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी मात्रा में यूरिया कम कीमत पर खरीदा जाता है, आपूर्ति कब मिलती है और अन्य लागतें कितनी रहती हैं।

इसके अलावा, किसानों की खेती की लागत केवल यूरिया पर निर्भर नहीं करती। डीजल, बीज, मजदूरी और दूसरे उर्वरकों की कीमतें भी कृषि खर्च को प्रभावित करती हैं। इसलिए यूरिया की कीमतों में गिरावट से मिलने वाली राहत को खेती की कुल लागत में संभावित राहत के एक हिस्से के रूप में देखना चाहिए।

आगे कीमतों पर रहेगी बाजार की नजर

भारत के हालिया यूरिया आयात टेंडर में कम कीमतों के प्रस्ताव मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत के संकेत मिले हैं। पश्चिमी और पूर्वी तट के लिए मिले प्रस्तावों से यह भी पता चलता है कि आयात के लिए कंपनियों की ओर से पर्याप्त आपूर्ति पेश की गई।

फिलहाल, इन प्रस्तावों को वास्तविक खरीद कीमत या किसानों के लिए खुदरा कीमत में तत्काल बदलाव के बराबर नहीं माना जा सकता। अंतिम खरीद दर, आपूर्ति की शर्तों और सरकार की सब्सिडी व्यवस्था के आधार पर ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट भारत के लिए महत्वपूर्ण है। रबी सीजन से पहले कम कीमतों पर आयात होने से उर्वरक उपलब्धता बनाए रखने और सरकारी खर्च पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अंतिम खरीद किन दरों पर होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का रुख आगे कैसा रहता है।

 

Tags: अंतरराष्ट्रीय बाजारइंडियन पोटाश लिमिटेडउर्वरक समाचारकृषि समाचारखाद समाचारयूरियायूरिया आयातयूरिया सब्सिडीरबी सीजन
Previous Post

3 यूरिया संयंत्रों की फिक्स्ड कॉस्ट की समीक्षा कर सकती है सरकार

Next Post

छत्तीसगढ़ में खाद वितरण के लिए टोकन व्यवस्था की तैयारी, जानें किसानों को क्या होगा फायदा

Next Post
छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए खाद वितरण टोकन व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में खाद वितरण के लिए टोकन व्यवस्था की तैयारी, जानें किसानों को क्या होगा फायदा

Recent Posts

  • अमेठी के इफको केंद्र पर खाद वितरण में खामियां, 4 अधिकारियों को नोटिस
  • ललितपुर में खाद की 2 दुकानों के लाइसेंस निलंबित, सहकारी समिति को नोटिस
  • छत्तीसगढ़ में खाद वितरण के लिए टोकन व्यवस्था की तैयारी, जानें किसानों को क्या होगा फायदा
  • यूरिया आयात की कीमतों में 10% गिरावट, किसानों को मिलेगी राहत?
  • 3 यूरिया संयंत्रों की फिक्स्ड कॉस्ट की समीक्षा कर सकती है सरकार

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version