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Home कृषि समाचार

यूरिया आयात की कीमतों में गिरावट, किसानों और सरकार को राहत की उम्मीद

भारत के नए यूरिया टेंडर में कीमतों की पेशकश अगस्त की खरीद से करीब 10% कम रही। जानें रबी सीजन, किसानों और उर्वरक सब्सिडी पर इसका संभावित असर।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 9, 2026
in कृषि समाचार
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भारत के यूरिया आयात टेंडर में कीमतों में गिरावट
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भारत में यूरिया आयात के नए टेंडर में कीमतों में गिरावट के संकेत मिले हैं। अगस्त में हुई पिछली खरीद के मुकाबले इस बार आयातकों को लगभग 10 प्रतिशत कम कीमत पर यूरिया की पेशकश मिली है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों को लेकर कुछ राहत की उम्मीद जगी है। भारत दुनिया के प्रमुख यूरिया आयातक देशों में शामिल है और यहां होने वाली खरीद को दूसरे आयातक देशों के लिए भी कीमतों के संकेतक के रूप में देखा जाता है।

भारतीय पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की ओर से जारी यूरिया टेंडर में पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर से 416.50 डॉलर प्रति टन तक की पेशकश मिली। वहीं, पूर्वी तट के लिए कीमतें 352.10 डॉलर से 465 डॉलर प्रति टन के बीच रहीं। यह जानकारी टेंडर से सीधे जुड़े कारोबारियों के हवाले से सामने आई है। टेंडर बुधवार को बंद हुआ था।

दोनों क्षेत्रों में आपूर्तिकर्ताओं की ओर से पेश की गई यूरिया की कुल मात्रा एजेंसी की जरूरत से दोगुने से भी अधिक रही। इससे संकेत मिलता है कि इस खरीद के लिए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति की पेशकश मौजूद थी। हालांकि, टेंडर में मिली कीमतों और वास्तविक खरीद के अंतिम परिणामों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने का आकलन अंतिम खरीद कीमतों और घरेलू वितरण व्यवस्था के आधार पर ही किया जा सकेगा।

अगस्त की खरीद से कम कीमत पर यूरिया की पेशकश

भारत ने अगस्त में हुए पिछले यूरिया टेंडर में 390.25 डॉलर से 393.65 डॉलर प्रति टन की दर पर यूरिया खरीदा था। इसके मुकाबले नए टेंडर में पश्चिमी तट के लिए सबसे कम पेशकश 356.25 डॉलर और पूर्वी तट के लिए 352.10 डॉलर प्रति टन रही।

इस तुलना से पता चलता है कि नए टेंडर में सबसे कम पेशकश पिछली खरीद की कीमतों से नीचे रही है। हालांकि, सभी पेशकशों की तुलना केवल न्यूनतम दरों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। आपूर्ति का स्थान, माल की मात्रा, परिवहन खर्च और खरीद की शर्तें भी अंतिम लागत को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत सरकार की ओर से यूरिया आयात में भारतीय पोटाश लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरिया आयात करती है। देश में यूरिया की मांग कृषि गतिविधियों और फसलों की पोषण संबंधी जरूरतों से जुड़ी रहती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव का असर उर्वरक खरीद की लागत पर पड़ सकता है।

ईरान संघर्ष के बाद बढ़ी थीं कीमतें

इस साल अंतरराष्ट्रीय यूरिया बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ईरान में युद्ध से मध्य पूर्व की महत्वपूर्ण आपूर्ति पर असर पड़ने के बाद यूरिया की कीमतों में तेजी आई थी। भारत को संघर्ष शुरू होने के दौरान यूरिया के लिए अधिकतम 959 डॉलर प्रति टन तक की कीमत चुकानी पड़ी थी।

इसके बाद आपूर्ति संबंधी बाधाएं कम होने और वैश्विक मांग कमजोर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आई। नए टेंडर में कम कीमतों पर मिली पेशकश को इसी बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मध्य पूर्व वैश्विक उर्वरक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। वहां आपूर्ति बाधित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इसके उलट, आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने पर आयातकों को अपेक्षाकृत कम कीमतों पर खरीद के अवसर मिल सकते हैं।

यूरिया की कीमतों में गिरावट से केवल भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे आयातक देशों को भी राहत मिलने की संभावना है। इस साल किसानों को यूरिया के अलावा डीजल जैसे अन्य कृषि इनपुट की ऊंची लागत का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में उर्वरकों की कीमतों में कमी खेती की कुल लागत के दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।

रबी सीजन से पहले बढ़ेगी यूरिया की जरूरत

भारत में रबी फसलों की बुवाई की तैयारी के दौरान यूरिया की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है। गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों की खेती के लिए किसान खेतों की तैयारी और पोषक तत्वों के प्रबंधन पर ध्यान देते हैं। यूरिया नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है, जो पौधों की वृद्धि और फसल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रबी सीजन से पहले यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना सरकार और उर्वरक वितरण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आयात की लागत कम रहती है, तो जरूरत के अनुसार यूरिया खरीदने में सरकार को मदद मिल सकती है। इसके साथ ही समय पर आयात, घरेलू उत्पादन और राज्यों तक उर्वरक पहुंचाने की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी।

किसानों के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का कम होना पर्याप्त नहीं है। उन्हें बुवाई और फसल की जरूरत के समय स्थानीय बाजार में यूरिया उपलब्ध होना भी जरूरी है। इसलिए टेंडर में कम कीमतों की पेशकश का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित यूरिया कितनी मात्रा में और कितनी जल्दी देश में पहुंचता है।

उर्वरक सब्सिडी पर भी पड़ सकता है असर

भारत में किसानों को यूरिया नियंत्रित खुदरा कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। उत्पादन और आयात की लागत तथा किसानों से मिलने वाली कीमत के बीच का अंतर सरकारी सब्सिडी व्यवस्था के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसलिए यूरिया की आयात कीमतों में गिरावट से सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम बनी रहती हैं और सरकार को कम लागत पर यूरिया उपलब्ध होता है, तो सब्सिडी की जरूरत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, कुल बचत का आकलन करने के लिए आयात की वास्तविक कीमत, खरीदी गई मात्रा, घरेलू उत्पादन लागत और अन्य खर्चों को भी देखना होगा।

इसके विपरीत, यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें दोबारा बढ़ती हैं या आपूर्ति में व्यवधान आता है, तो लागत पर दबाव फिर बढ़ सकता है। इसलिए एक टेंडर में मिली कम कीमतों को स्थायी गिरावट का संकेत मानने के बजाय बाजार की मौजूदा स्थिति के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

किसानों को राहत के लिए क्या जरूरी?

यूरिया की कम आयात कीमतें कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आपूर्ति और वितरण व्यवस्था का प्रभावी होना जरूरी है। रबी सीजन में मांग बढ़ने के दौरान राज्यों और जिलों तक पर्याप्त मात्रा में उर्वरक पहुंचाना महत्वपूर्ण रहेगा।

साथ ही, किसानों को यूरिया का इस्तेमाल फसल की जरूरत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए। केवल कीमत कम होने या उपलब्धता बढ़ने के कारण जरूरत से अधिक यूरिया डालना उचित नहीं है। संतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की सेहत बनाए रखने और पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, भारत के नए यूरिया टेंडर में कम कीमतों की पेशकश अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में दबाव घटने का संकेत देती है। इससे आगामी रबी सीजन से पहले आयात लागत और सरकारी सब्सिडी पर राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, किसानों को वास्तविक फायदा कितना मिलेगा, यह अंतिम खरीद कीमतों, आपूर्ति की उपलब्धता और घरेलू वितरण पर निर्भर करेगा।

 

Tags: उर्वरक सब्सिडीउर्वरक समाचारकृषि समाचारखाद आयातभारतीय पोटाश लिमिटेडयूरियारबी सीजन
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