यवतमाल: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में कृषि विभाग ने अवैध उर्वरक निर्माण और भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 24.7 लाख रुपये मूल्य का फर्टिलाइजर जब्त किया है। यह कार्रवाई यवतमाल शहर के पास स्थित भोयर MIDC क्षेत्र में संचालित एक कथित गैर-कानूनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर की गई। अधिकारियों ने देर रात छापेमारी कर बड़ी मात्रा में उर्वरक स्टॉक बरामद किया और फैक्ट्री मालिक समेत तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया।
जानकारी के अनुसार, यह संयुक्त कार्रवाई कृषि आयुक्तालय, पुणे, अमरावती संभाग के संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय तथा यवतमाल जिला कृषि विभाग की टीमों द्वारा की गई। हाल के दिनों में कृषि विभाग को क्षेत्र में बिना अनुमति उर्वरक निर्माण और बिक्री से संबंधित शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने गुप्त जांच शुरू की और पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद संबंधित यूनिट पर छापा मारा।
जांच के दौरान अधिकारियों को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। टीम ने पाया कि संबंधित इकाई के पास उर्वरक निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और भंडारण (स्टोरेज) के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद वहां बड़े पैमाने पर उर्वरकों का उत्पादन और भंडारण किया जा रहा था। कृषि विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस संचालित होने वाली ऐसी इकाइयां किसानों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं, क्योंकि इनसे तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और मानकों की कोई गारंटी नहीं होती।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 2,151 बैग उर्वरक जब्त किए, जिनका कुल वजन 107.55 मीट्रिक टन बताया गया है। जब्त किए गए स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब 24.7 लाख रुपये आंकी गई है। अधिकारियों ने पूरे स्टॉक को सील कर अपने कब्जे में ले लिया है और नमूनों की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
इस मामले में यवतमाल पंचायत समिति के उर्वरक निरीक्षक एवं कृषि अधिकारी संजय अनंत पवार द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर लोहारा/MIDC पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक सहित तीन व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
लोहारा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर रोहित चौधरी ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह अवैध गतिविधि कब से संचालित हो रही थी, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य क्षेत्रों में चल रही समान गतिविधियों से भी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित उर्वरक उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कृषि विभाग को दें। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यभर में उर्वरकों के अवैध उत्पादन, भंडारण और बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे।

