जून 2026 में वैश्विक उर्वरक बाजार ने मिले-जुले संकेत दिए हैं। जहां यूरिया की कीमतें मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं, वहीं फॉस्फेट आधारित उर्वरकों—विशेष रूप से DAP (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) और MAP (मोनो-अमोनियम फॉस्फेट)—के बाजार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मांग और आपूर्ति की स्थिति उर्वरक बाजार की दिशा तय करेगी।
यूरिया बाजार में जून के दौरान सबसे बड़ा प्रभाव मध्य पूर्व की परिस्थितियों का रहा। क्षेत्र में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट, को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार को सतर्क बनाए रखा। हालांकि किसी बड़े आपूर्ति व्यवधान की स्थिति नहीं बनी, लेकिन संभावित जोखिमों के कारण खरीदार और विक्रेता दोनों सावधानी बरतते रहे। इसी वजह से यूरिया की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली और बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।
यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस एक प्रमुख कच्चा माल है। मध्य पूर्व दुनिया के महत्वपूर्ण गैस और उर्वरक निर्यातक क्षेत्रों में शामिल है। इसलिए क्षेत्रीय तनाव का असर सीधे यूरिया बाजार की धारणा पर पड़ता है। कई आयातक देशों ने संभावित जोखिमों को देखते हुए अपनी खरीद रणनीति को संतुलित रखा, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।
दूसरी ओर, DAP और MAP जैसे फॉस्फेट उर्वरकों का बाजार अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया। विभिन्न प्रमुख आयातक देशों में मांग अपेक्षा से कम रहने के संकेत मिले हैं। कई क्षेत्रों में खरीदार कीमतों में और गिरावट की उम्मीद में नई खरीद को टाल रहे हैं। इससे बाजार में दबाव बढ़ा है और विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों की पेशकश करनी पड़ रही है।
फॉस्फेट बाजार पर एक अन्य महत्वपूर्ण कारक आपूर्ति की स्थिति है। पिछले कुछ महीनों में उत्पादन और निर्यात गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है। प्रमुख उत्पादक देशों से आपूर्ति बेहतर होने लगी है, जिससे बाजार में उपलब्धता बढ़ी है। जब आपूर्ति बढ़ती है और मांग कमजोर रहती है, तो कीमतों पर स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर दबाव बनता है। वर्तमान में DAP और MAP बाजार इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
भारत जैसे बड़े आयातक देशों की खरीद गतिविधियां भी वैश्विक बाजार को प्रभावित करती हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े DAP और यूरिया आयातकों में शामिल है। यदि भारतीय बाजार में खरीद की गति धीमी रहती है या पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में बाजार का रुख तेजी से बदल भी सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह यूरिया और फॉस्फेट दोनों बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है और समुद्री आपूर्ति प्रभावित होती है, तो यूरिया की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, यदि स्थिति सामान्य बनी रहती है और गैस आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ता, तो कीमतों में नरमी की संभावना भी बनी रहेगी।
DAP और MAP के मामले में बाजार का ध्यान मुख्य रूप से मांग की वापसी पर रहेगा। यदि प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सीजनल खरीद बढ़ती है, तो कीमतों को कुछ समर्थन मिल सकता है। लेकिन फिलहाल बेहतर होती आपूर्ति और कमजोर मांग की धारणा बाजार को दबाव में रखे हुए है।
कुल मिलाकर, जून 2026 का फर्टिलाइज़र मार्केट आउटलुक एक संतुलित लेकिन अनिश्चित तस्वीर पेश करता है। यूरिया बाजार भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण स्थिर बना हुआ है, जबकि DAP और MAP बाजार मांग की कमजोरी और बेहतर आपूर्ति के कारण दबाव झेल रहे हैं। आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और कृषि मांग के रुझान उर्वरक उद्योग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

