क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI) ने भारत के एग्रोकेमिकल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में डेटा प्रोटेक्शन या डेटा एक्सक्लूसिविटी प्रावधान लागू करने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता जताई है। फेडरेशन का कहना है कि ऐसे कदम से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और किसानों की सस्ती फसल सुरक्षा उत्पादों तक पहुंच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
CCFI के चेयरमैन दीपक शाह ने कहा कि मौजूदा 20 साल के पेटेंट सिस्टम के अलावा अतिरिक्त एक्सक्लूसिविटी देने से बाजार में मोनोपॉली की स्थिति बन सकती है। इससे जेनेरिक प्रोडक्ट्स की एंट्री में देरी होगी, किसानों के लिए इनपुट लागत बढ़ेगी और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
फेडरेशन के अनुसार, भारत की एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री देश के कुल निर्यात में अहम भूमिका निभाती है और 167 से अधिक देशों को सप्लाई करती है। यह सेक्टर करीब 80% एक्सपोर्ट में योगदान देता है और पिछले पांच वर्षों में लगभग 16 बिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस हासिल कर चुका है। भारत फिलहाल दुनिया के शीर्ष तीन एग्रोकेमिकल निर्यातकों में शामिल है, जिसकी ताकत बड़े पैमाने पर जेनेरिक उत्पादों के निर्माण में है।
CCFI ने बताया कि वैश्विक एग्रोकेमिकल बाजार का लगभग 90% हिस्सा जेनेरिक उत्पादों का है, क्योंकि अधिकांश मॉलिक्यूल्स के पेटेंट समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू होने से ऑफ-पेटेंट प्रोडक्ट्स की एंट्री में बाधा आएगी और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी।
फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के मौजूदा कानून, जैसे कि इंसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 और प्रस्तावित पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट बिल, डेटा एक्सक्लूसिविटी का समर्थन नहीं करते हैं। साथ ही, संसद की विभिन्न समितियों ने भी इस तरह के प्रावधानों का विरोध किया है।
CCFI द्वारा तैयार किए गए एक व्हाइट पेपर में दस प्रमुख कारणों के साथ डेटा एक्सक्लूसिविटी का विरोध किया गया है। यह दस्तावेज कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपा गया है। फेडरेशन का कहना है कि ऐसे प्रावधान ‘मेक इन इंडिया’ पहल के खिलाफ होंगे और देश की सप्लाई चेन को कमजोर कर सकते हैं।
CCFI ने चेतावनी दी कि यदि डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू की गई, तो इससे आयात बढ़ेगा, घरेलू उत्पादन घटेगा और अंततः किसानों की लागत में वृद्धि होगी, जिससे उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
