भारत में नकली पेस्टिसाइड्स की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जहां कानून मौजूद होने के बावजूद ज़मीन पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन अक्सर कमजोर रहा है। ऐसे में प्रस्तावित पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 (PMB 2025) इस स्थिति को बदलने की कोशिश करता है, जिसमें फोकस सिर्फ नियम बनाने पर नहीं, बल्कि उन्हें तेज़ और प्रभावी तरीके से लागू करने पर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नकली एग्रोकेमिकल का कारोबार वहीं पनपता है जहां जांच में देरी होती है और सज़ा का डर कम होता है। कई बार सैंपल की जांच में महीनों लग जाते हैं, जिससे संदिग्ध उत्पाद बाजार में बिकते रहते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए PMB 2025 में डिजिटल, ट्रेसेबल और तेज़ रिस्पॉन्स वाला सिस्टम प्रस्तावित किया गया है।
बिल की सबसे अहम विशेषताओं में पेस्टिसाइड इंस्पेक्टरों को बढ़े हुए अधिकार शामिल हैं। अब इंस्पेक्टर संदिग्ध जगहों पर प्रवेश, तलाशी और वाहनों की जांच कर सकेंगे। साथ ही वे दस्तावेज़, रजिस्टर और सप्लाई चेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच, कॉपी और जब्ती भी कर सकेंगे, जिससे गैर-कानूनी नेटवर्क का पता लगाना आसान होगा।
बिल में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि इंस्पेक्टर संदिग्ध पेस्टिसाइड्स की बिक्री, वितरण या उपयोग पर अस्थायी रोक लगा सकते हैं। यह रोक अधिकतम 60 दिनों तक या जांच रिपोर्ट आने तक लागू रह सकती है। इससे जांच के दौरान भी नुकसान को रोका जा सकेगा।
सैंपलिंग प्रक्रिया को भी अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया गया है। सैंपल की सीलिंग, मार्किंग और डॉक्यूमेंटेशन के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, साथ ही QR कोड और बारकोड जैसी तकनीकों के उपयोग की अनुमति दी गई है। इससे सबूतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और कानूनी मामलों में मजबूती आएगी।
टेस्टिंग प्रक्रिया में देरी कम करने के लिए भी तय समयसीमा रखी गई है। पेस्टिसाइड एनालिस्ट को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी, और इसके बाद 10 दिनों के अंदर संबंधित पक्षों को डिजिटल माध्यम से जानकारी देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, दोषी पाए जाने पर उत्पाद की जब्ती और सार्वजनिक रूप से जानकारी जारी करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं, जिससे बाज़ार में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत काम करने वालों पर दबाव बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि PMB 2025 यदि प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह किसानों के हितों की रक्षा करते हुए नकली पेस्टिसाइड्स के खिलाफ एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

