भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास को नई दिशा देने वाले कई अहम फैसले लिए गए। इन फैसलों का सीधा असर कृषि, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, महिला एवं बाल विकास और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। खासतौर पर किसानों के लिए 2442.04 करोड़ रुपये के “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी देना इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण रहा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश में दलहन उत्पादन को बढ़ाना, किसानों की आय को स्थिर करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। यह महत्वाकांक्षी योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल खेती का रकबा बढ़ेगा बल्कि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने पर जोर
इस मिशन के तहत किसानों को उन्नत और जलवायु-अनुकूल बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही बीज उत्पादन और वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिल सके। खेत स्तर पर प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि किसान नई तकनीकों को अपनाकर अपनी उत्पादकता बढ़ा सकें। इसके अलावा कटाई के बाद प्रोसेसिंग, भंडारण और पैकेजिंग की सुविधाओं को विकसित करने पर भी जोर रहेगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित कीमत मिल सके।
ग्रामीण सड़कों पर 32 हजार करोड़ से अधिक का निवेश
कैबिनेट ने ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 32,405 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण सड़कों के निर्माण, मौजूदा मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव में किया जाएगा। इससे गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से ट्रांसपोर्ट लागत भी कम होगी, जिससे किसानों की आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
आंगनवाड़ी और बच्चों के भविष्य पर खास ध्यान
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत सरकार ने 1500 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण को मंजूरी दी है। इसके साथ ही मिशन वात्सल्य के संचालन के लिए 2412 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस कदम से बच्चों के पोषण, शिक्षा और संरक्षण से जुड़ी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।
समग्र विकास की दिशा में कदम
कैबिनेट के इन फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार कृषि से लेकर सामाजिक क्षेत्र तक संतुलित विकास पर जोर दे रही है। जहां एक ओर किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता पर फोकस है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के पोषण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

