दक्षिण गुजरात के कई इलाकों में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ली। डांग, कपराडा और तापी जिलों के कुछ हिस्सों में तेज़ हवाओं के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को चिलचिलाती गर्मी से थोड़ी राहत मिली। हालांकि बारिश बहुत ज़्यादा नहीं हुई और इसका असर सीमित क्षेत्रों तक ही रहा, लेकिन पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहने से मौसम सुहावना बना रहा। कई दिनों से लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम में आए इस बदलाव ने लोगों को राहत तो दी, लेकिन इसके साथ ही किसानों, खासकर आम उत्पादकों की चिंता भी बढ़ा दी है।
दक्षिण गुजरात के अधिकांश हिस्सों में गुरुवार सुबह से ही मौसम बदला हुआ दिखाई दिया। तेज़ धूप की जगह बादलों ने आसमान को ढक लिया और कई इलाकों में ठंडी हवाएं चलने लगीं। डांग, तापी और कपराडा में हल्की बूंदाबांदी और तेज़ हवाओं ने मौसम को अचानक बदल दिया। लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की, हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इलाके का अधिकतम तापमान बुधवार के 36 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर गुरुवार को लगभग 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादल और हवाओं के कारण लोगों को तापमान कम महसूस हुआ, लेकिन वास्तविक तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, भले ही बीच-बीच में बादल छाए रहें या हल्की बारिश होती रहे।
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे अधिक असर आम उत्पादक किसानों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दक्षिण Gujarat के वलसाड, नवसारी और सूरत जिले राज्य के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इस समय इन इलाकों में आम की कटाई का सीजन चल रहा है और किसान बड़े पैमाने पर फलों की तुड़ाई और सप्लाई में लगे हुए हैं। ऐसे समय में तेज़ हवाओं और बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
हॉर्टिकल्चर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि बारिश और तेज़ हवाओं का दौर लंबा चलता है, तो आम की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, “तेज़ हवाओं के साथ बारिश आम की फसल के लिए खतरा बन सकती है, क्योंकि इस समय पेड़ों पर बड़ी मात्रा में तैयार फल मौजूद हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।”
किसानों को डर है कि अगर अगले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह बना रहा तो पेड़ों से आम गिर सकते हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कई किसानों का कहना है कि आम की फसल इस समय बेहद संवेदनशील अवस्था में है और तेज़ हवाओं के कारण फलों के गिरने की आशंका बढ़ जाती है। इससे बाजार में सप्लाई कम हो सकती है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
खेती विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि कटाई के मौसम में लंबे समय तक नमी रहने से स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में दिक्कतें आ सकती हैं। नमी बढ़ने से फलों के जल्दी खराब होने का खतरा रहता है, जिससे व्यापारियों और निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम सामान्य नहीं हुआ तो आम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात पर भी पड़ सकता है।
दक्षिण गुजरात में मौसम का यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार तापमान बढ़ने के कारण लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा था। ऐसे में बादलों और ठंडी हवाओं ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन मौसम विभाग ने साफ किया है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर से आने वाली नमी और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक हल्के बादल और छिटपुट बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि इसके बावजूद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में इस तरह के अचानक बदलाव अब सामान्य होते जा रहे हैं और इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। खासकर फलों और सब्जियों जैसी संवेदनशील फसलों पर बेमौसम बारिश और तेज़ हवाओं का असर सबसे अधिक देखने को मिलता है। फिलहाल किसान मौसम पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में हालात ज्यादा खराब न हों।

