DarjeelingTea: पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग का चाय उद्योग इस साल राहत की सांस ले रहा है. पिछले दो वर्षों तक सूखे और खराब मौसम की मार झेलने के बाद इस बार मौसम ने चाय बागानों का पूरा साथ दिया है. समय पर हुई बारिश और अनुकूल तापमान की वजह से दार्जिलिंग की मशहूर ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय का उत्पादन बेहतर हुआ है. चाय उत्पादकों और निर्यातकों को उम्मीद है कि इस साल पहली फसल का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
दार्जिलिंग की ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय दुनिया की सबसे प्रीमियम और महंगी चायों में गिनी जाती है. यह चाय साल की पहली फसल होती है, जिसकी तुड़ाई आमतौर पर मार्च के मध्य से शुरू होकर अप्रैल के अंत तक चलती है. इसकी खास खुशबू, हल्का स्वाद और सीमित उत्पादन इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद खास बनाता है. यही वजह है कि मात्रा में कम होने के बावजूद यह चाय उद्योग की आय का बड़ा हिस्सा तय करती है.
इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (ITEA) के अध्यक्ष अंशुमन कनोरिया के मुताबिक, इस साल दार्जिलिंग की पहली फसल पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी बेहतर रही है. उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में लंबे सूखे और मौसम की अनिश्चितता के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था, लेकिन इस बार मौसम संतुलित रहने से पौधों की वृद्धि अच्छी हुई है और गुणवत्ता भी बेहतर मिली है.
विशेषज्ञों के अनुसार, दार्जिलिंग की कुल वार्षिक चाय उत्पादन में ‘फर्स्ट फ्लश’ का हिस्सा करीब 20 प्रतिशत होता है, लेकिन कमाई के लिहाज से इसका योगदान लगभग 40 प्रतिशत तक माना जाता है. यही कारण है कि पहली फसल का अच्छा होना चाय बागान मालिकों और मजदूरों दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
कुर्सियोंग घाटी स्थित गिद्दापहाड़ चाय बागान के मालिक हिमांशु कुमार शॉ ने बताया कि इस बार लगभग सभी चाय बागानों में पर्याप्त बारिश हुई, जिससे चाय की पत्तियों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि कई बागानों में पिछले साल की तुलना में उत्पादन में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई है और उद्योग को इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है.
दार्जिलिंग की चाय की गुणवत्ता काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है. खासकर ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय के लिए ठंडा मौसम, हल्की धूप और संतुलित बारिश बेहद जरूरी होती है. इस बार मौसम की अनुकूलता ने चाय उत्पादकों की उम्मीदों को मजबूत किया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दार्जिलिंग चाय की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.
चाय उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में भी मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो दार्जिलिंग का चाय कारोबार फिर से मजबूती हासिल कर सकता है और इससे हजारों मजदूरों और छोटे उत्पादकों की आय में भी सुधार होगा.
