साल 2026 की शुरुआत में भारत के कॉफी निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए नई रफ्तार पकड़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान देश का कुल कॉफी एक्सपोर्ट 26.6 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.37 लाख टन था। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी की बढ़ी हुई शिपमेंट को वजह माना जा रहा है।
Coffee Board of India के आंकड़ों के मुताबिक, निर्यात के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल निर्यात मूल्य 757.07 करोड़ रुपये से बढ़कर 936.57 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, प्रति टन औसत कीमत (यूनिट वैल्यू रियलाइजेशन) 4,75,023 रुपये से बढ़कर 4,94,766 रुपये प्रति टन पहुंच गई।
कैटेगरी के अनुसार देखें तो रोबस्टा कॉफी का निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 85,168 टन हो गया, जो पिछले साल 62,736 टन था। इंस्टेंट कॉफी का निर्यात भी बढ़कर 20,332 टन हो गया, जबकि इसका री-एक्सपोर्ट 30,274 टन से बढ़कर 38,169 टन पहुंच गया। हालांकि, अरेबिका कॉफी के निर्यात में गिरावट देखी गई है, जो 72,479 टन से घटकर 30,589 टन रह गया।
भारत ने वर्ष 2025 में कुल 3.82 लाख टन कॉफी का निर्यात किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भारतीय कॉफी सेक्टर नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक कॉफी बाजार में देश की भूमिका अब केवल पारंपरिक रोबस्टा सप्लायर तक सीमित नहीं रह गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान, निर्यात मूल्य में वृद्धि, प्रोसेसिंग के लिए बढ़ते आयात और घरेलू खपत में लगातार बढ़ोतरी इस सेक्टर को एक नए मोड़ पर ले जा रहे हैं।
कॉफी बोर्ड के 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के पोस्ट-ब्लॉसम अनुमान के अनुसार, देश का कुल कॉफी उत्पादन रिकॉर्ड 4,03,000 टन तक पहुंच सकता है। इसमें कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
अनुमान के मुताबिक, अरेबिका उत्पादन करीब 1,18,000 टन और रोबस्टा उत्पादन 2,84,000 टन से अधिक हो सकता है, जिसका कारण बेहतर पैदावार और अनुकूल नमी की स्थिति है।
हालांकि, मौसम में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम इस सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
