कृषि अनुसंधान और नवाचारों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ICAR-Central Research Institute for Jute and Allied Fibres (भाकृअनुप-केन्द्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान-क्रिजाफ) ने विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026 के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। 30 अप्रैल 2026 को बैरकपुर, कोलकाता स्थित संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था — “बौद्धिक संपदा और खेल: तैयार, शुरू, नवाचार!” (IP and Sport: Ready, Set, Innovate!).
कार्यशाला का उद्देश्य वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों और कृषि विशेषज्ञों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के महत्व तथा कृषि अनुसंधान में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में 50 से अधिक वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों तथा कृषि विज्ञान केंद्र, उत्तर 24 परगना के विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता Anjan Sen, प्राचार्य एवं प्रबंध पेटेंट अटॉर्नी, मेसर्स अंजन सेन एंड एसोसिएट्स, कोलकाता रहे। उन्होंने “कृषि में विशेष रूप से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग में आईपीआर की भूमिका” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलावों और नवाचारों से गुजर रहा है, ऐसे में वैज्ञानिक खोजों और तकनीकों की कानूनी सुरक्षा बेहद आवश्यक हो गई है।
उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन पंजीकरण जैसे माध्यम वैज्ञानिक नवाचारों को संरक्षण प्रदान करते हैं। इससे शोधकर्ताओं को उनके कार्य का उचित अधिकार और पहचान मिलती है, साथ ही तकनीकों के व्यावसायीकरण का रास्ता भी मजबूत होता है।
श्री अंजन सेन ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों, समझौतों और बौद्धिक संपदा संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी कृषि तकनीक या नवाचार को प्रयोगशाला से बाजार तक सफलतापूर्वक पहुंचाने के लिए आईपीआर सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिकों को सलाह दी कि वे अनुसंधान के शुरुआती चरण से ही पेटेंट और अन्य सुरक्षा उपायों पर ध्यान दें ताकि नवाचारों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक Gouranga Kar ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार संस्थान की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार की प्रतिबद्धता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि पेटेंट, डिजाइन पंजीकरण, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे अधिकार कृषि अनुसंधान संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।
डॉ. गौरांग कर ने किसानों तक नई तकनीकों और शोध आधारित समाधानों को पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान तभी सार्थक होता है जब उसका लाभ सीधे किसानों और समाज तक पहुंचे। इसलिए तकनीक हस्तांतरण और नवाचारों के व्यावसायीकरण की दिशा में भी तेजी से काम करने की जरूरत है।
कार्यशाला में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के संदर्भ में आईपीआर की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कृषि क्षेत्र में विकसित नई तकनीकों, जैविक उत्पादों और उन्नत कृषि पद्धतियों की सुरक्षा से किसानों को बेहतर और प्रमाणिक तकनीक उपलब्ध कराई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने आईपीआर से जुड़े विभिन्न तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से प्रश्न भी पूछे। वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने पेटेंट प्रक्रिया, तकनीक हस्तांतरण और कृषि आधारित स्टार्टअप्स के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि अनुसंधान में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता भारत को कृषि नवाचार और एग्री-टेक क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भाकृअनुप-क्रिजाफ द्वारा आयोजित यह कार्यशाला कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को सुरक्षित तथा व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

