हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। ठियोग से कांग्रेस विधायक और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में ‘बागवानी संकट’ की स्थिति बनने का दावा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाल के आर्थिक फैसलों का सीधा असर पहाड़ी राज्यों के बागवानों पर पड़ रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।
राठौर ने खास तौर पर भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क में कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनके मुताबिक, आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करना स्थानीय उत्पादकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे विदेशी सेब भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे हिमाचल के बागवानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इसका असर केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे अन्य पहाड़ी राज्यों के सेब उत्पादक भी इससे प्रभावित होंगे। राठौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की व्यापार नीतियां बड़े आयातकों को फायदा पहुंचाने वाली हैं, जबकि छोटे और मध्यम किसान इससे नुकसान में जा रहे हैं।
राहुल गांधी के साथ हुई विस्तृत चर्चा
कांग्रेस विधायक ने बताया कि कांगड़ा दौरे के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ करीब चार घंटे तक चली विस्तृत बैठक में बागवानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति बना रही है।
राठौर के अनुसार, जल्द ही हिमाचल के बागवानों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात करेगा और अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रखेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद और अन्य मंचों पर भी उठाएगी ताकि बागवानों को राहत मिल सके।
महंगाई और एलपीजी कीमतों पर भी सरकार घिरी
बागवानी मुद्दे के अलावा राठौर ने बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडर महंगे होने से होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
राठौर ने मांग की कि केंद्र सरकार किसानों और बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों की समीक्षा करे और आयात शुल्क जैसे फैसलों पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बागवानी क्षेत्र गंभीर संकट में आ सकता है।

