• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

डिजिटल इंडिया के 11 साल: ई-सरस बना ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, 8.99 करोड़ एसएचजी सदस्य जुड़े

डिजिटल इंडिया के 11 साल: ई-सरस बना ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, 8.99 करोड़ एसएचजी सदस्य जुड़े

Emran Khan by Emran Khan
July 13, 2026
in कृषि समाचार
0
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

डिजिटल इंडिया अभियान के 11 वर्ष पूरे होने के साथ भारत का डिजिटल परिवर्तन अब गांवों की अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण तक गहराई से पहुंच चुका है। इस बदलाव का सबसे प्रभावशाली उदाहरण ई-सरस (e-SARAS) प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया है, जिसने देशभर के स्वयं सहायता समूहों (SHGs), महिला उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को डिजिटल बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते खोले हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से विकसित यह डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म आज ग्रामीण भारत के लाखों उत्पादकों के लिए राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच का सशक्त माध्यम बन चुका है। ई-सरस के जरिए महिलाएं अब अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें बेहतर मूल्य मिलने लगा है।

8.99 करोड़ महिलाएं बनीं डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ई-सरस प्लेटफॉर्म से वर्तमान में 8.99 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्य जुड़े हुए हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े महिला-नेतृत्व वाले आजीविका नेटवर्क में से एक माना जाता है।

इस प्लेटफॉर्म पर 1,400 से अधिक ग्रामीण उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनमें चिप्स, पापड़, शहद, मसाले, अचार, जैम, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, डेयरी उत्पाद, हर्बल उत्पाद और गृह सज्जा की वस्तुएं शामिल हैं। वहीं 800 से अधिक खरीदार तथा 11 से अधिक ओएनडीसी (ONDC) आधारित खरीदार एप्लिकेशन इन उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।

इसके अलावा देशभर में हर वर्ष 50 से अधिक सरस मेलों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे ग्रामीण उत्पादों को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से बाजार उपलब्ध हो रहा है।

महिलाओं को मिला राष्ट्रीय बाजार तक सीधा रास्ता

ई-सरस की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने गांवों की महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर दिया है। पहले जहां स्वयं सहायता समूहों की बिक्री स्थानीय हाट-बाजार या मेलों तक सीमित रहती थी, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उनके उत्पाद पूरे भारत में खरीदे जा रहे हैं।

प्लेटफॉर्म पर डिजिटल ऑनबोर्डिंग, ऑनलाइन कैटलॉग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, सुरक्षित डिजिटल भुगतान, लॉजिस्टिक्स, ऑर्डर ट्रैकिंग और बहुभाषी सुविधा जैसी आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल व्यापार अपनाने में काफी आसानी हुई है।

‘लखपति दीदी’ मिशन को मिल रही नई गति

सरकार ने वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य रखा है। ई-सरस इस महत्वाकांक्षी अभियान को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को राष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही वे छोटे स्तर के घरेलू व्यवसायों को संगठित उद्यम में बदल रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल बाजारों तक महिलाओं की पहुंच इसी प्रकार बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

कृषि के साथ वैकल्पिक आय का मजबूत साधन

भारत के अधिकांश ग्रामीण परिवार आज भी कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन खेती से मिलने वाली आय अक्सर मौसम पर आधारित होती है। ऐसे में ई-सरस किसानों और स्वयं सहायता समूहों को पूरे वर्ष आय अर्जित करने का अवसर प्रदान कर रहा है।

यह प्लेटफॉर्म कृषि आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद, डेयरी, शहद, मोटे अनाज (श्रीअन्न), हस्तशिल्प, बांस उत्पाद, हथकरघा वस्त्र, हर्बल उत्पाद, गृह सज्जा सामग्री और अन्य ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इससे ग्रामीण परिवारों की कृषि पर निर्भरता कम हो रही है और उनकी आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।

कच्चे उत्पाद से ब्रांडेड उत्पाद तक का सफर

ई-सरस केवल बिक्री का माध्यम नहीं बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition) को भी बढ़ावा देता है।

स्वयं सहायता समूहों को कृषि उपज का प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर कच्चे आलू बेचने के बजाय उनसे चिप्स बनाकर बेचना, फलों से जैम और स्क्वैश तैयार करना, मसालों की पैकिंग करना या शहद को ब्रांडेड पैकेजिंग में बाजार तक पहुंचाना।

इस प्रकार ग्रामीण उत्पादकों को एक ही कृषि उत्पादन से अधिक आय प्राप्त होती है।

डिजिटल व्यापार के लिए विशेष प्रशिक्षण

ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल व्यापार से जोड़ने के लिए ई-सरस के अंतर्गत व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

इन कार्यक्रमों में महिलाओं को डिजिटल ऑनबोर्डिंग, उत्पाद सूचीकरण, फोटोग्राफी, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, इन्वेंटरी प्रबंधन, ग्राहक सेवा, वित्तीय साक्षरता और ऑनलाइन ऑर्डर प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इससे महिलाएं बिना किसी तकनीकी सहायता के स्वयं अपना ऑनलाइन व्यवसाय संचालित करने में सक्षम बन रही हैं।

आधुनिक तकनीक से जुड़ा सुरक्षित प्लेटफॉर्म

ई-सरस को डिजिटल इंडिया के कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसमें ओएनडीसी, उमंग, सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, एपीआई आधारित सत्यापन प्रणाली और भाषिणी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

भाषिणी के माध्यम से विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकता है। वहीं टेक्स्ट-टू-स्पीच, बड़े अक्षरों और विशेष सुगमता सुविधाओं के कारण वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए भी यह मंच उपयोगी साबित हो रहा है।

खुर्जा पॉटरी की सफलता बनी प्रेरणा

उत्तर प्रदेश के खुर्जा स्थित फलक स्वयं सहायता समूह की सफलता ई-सरस की प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जीआई टैग प्राप्त खुर्जा पॉटरी का निर्माण करने वाला यह समूह पहले केवल स्थानीय बाजारों और मेलों तक सीमित था। ई-सरस से जुड़ने के बाद पिछले साढ़े तीन वर्षों में इस समूह ने अपने हस्तनिर्मित मिट्टी के उत्पाद देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाए हैं।

विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के कारण अब नाजुक पॉटरी उत्पाद भी सुरक्षित रूप से ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे समूह की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डिजिटल भारत के साथ बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

ई-सरस की शुरुआत 28 अक्टूबर 2022 को वेब पोर्टल के रूप में हुई थी, जबकि 28 जून 2023 को इसका एंड्रॉयड मोबाइल एप लॉन्च किया गया। इसके बाद ओएनडीसी, डिजिटल भुगतान, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और डेटा विश्लेषण जैसी सुविधाओं के जुड़ने से इसकी पहुंच लगातार बढ़ती गई।

आज हजारों महिला स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद पूरे देश में बेच रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।

ग्रामीण भारत की डिजिटल क्रांति का मजबूत आधार

डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों में ई-सरस यह साबित कर चुका है कि यदि तकनीक को गांवों और महिलाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए, तो वह केवल डिजिटल सेवा नहीं बल्कि आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाना, किसानों की आय बढ़ाना और ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देना—इन सभी लक्ष्यों को पूरा करने में ई-सरस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले वर्षों में यह प्लेटफॉर्म भारत के ग्रामीण उद्यमों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

 

Tags: AgriFarmingSaras India
Previous Post

मेरठ में ACE ट्रैक्टर्स की नई डीलरशिप का शुभारंभ, किसानों ने किया गर्मजोशी से स्वागत

Next Post

आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी ने नागालैंड में वैज्ञानिक वाटरशेड योजना को दी नई दिशा, एलआरआई आधारित प्रशिक्षण से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन होगा मजबूत

Next Post
वैज्ञानिक भूमि आंकड़ों से बनेगी टिकाऊ कृषि की मजबूत नींव

आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी ने नागालैंड में वैज्ञानिक वाटरशेड योजना को दी नई दिशा, एलआरआई आधारित प्रशिक्षण से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन होगा मजबूत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस की पूर्व संध्या पर सिक्किम में ICAR-CIFRI की पहल
  • राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस पर आईसीएआर-सीआईएफई कोलकाता केंद्र में किसानों और उद्यमियों का हुआ सम्मान, वैज्ञानिक तकनीकों से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने पर जोर
  • आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी ने नागालैंड में वैज्ञानिक वाटरशेड योजना को दी नई दिशा, एलआरआई आधारित प्रशिक्षण से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन होगा मजबूत
  • डिजिटल इंडिया के 11 साल: ई-सरस बना ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, 8.99 करोड़ एसएचजी सदस्य जुड़े
  • मेरठ में ACE ट्रैक्टर्स की नई डीलरशिप का शुभारंभ, किसानों ने किया गर्मजोशी से स्वागत

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.