֍:किन जिलों से सामने आए मामले?§ֆ:एक आधिकारिक रिपोर्ट को जारी कर कहा गया कि आंकड़ा जनवरी 2001 से जनवरी 2025 के बीच अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशिम और यवतमाल जिलों में हुई मौतों का है. इसमें इस साल जनवरी में हुई 80 किसानों की आत्महत्याएं शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 24 वर्षों के दौरान अमरावती जिले में 5,395, अकोला जिले में 3,123, यवतमाल जिले में 6,211, बुलढाणा जिले में 4,442 और वाशिम जिले में 2,048 किसानों ने आत्महत्या की है. जनवरी 2025 में अमरावती जिले में 10, अकोला में 10, यवतमाल में 34, बुलढाणा में 10 और वाशिम जिले में सात किसानों ने आत्महत्या की है.§֍:क्या रही आत्महत्या की वजह?§ֆ:रिपोर्ट के अनुसार, 24 वर्षों में कुल आत्महत्याओं में से 9,970 मामले (सरकारी मुआवजे के लिए) पात्र थे, 10,963 अपात्र थे, जबकि 319 मामले जांच के लिए लंबित हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 9,740 मामलों में सहायता दी गई है. मौजूदा मानदंडों के अनुसार, केवल कुछ आत्महत्याएं ही मुआवजे के लिए पात्र हैं. इसमें से कुछ कारक यह साबित करते हैं कि यह कृत्य ऋण न चुकाने, फसल के नुकसान का परिणाम है और व्यक्तिगत कारणों से नहीं है.§֍:सरकार द्वारा सम्मानित किसान ने की आत्महत्या§ֆ:”पीटीआई” द्वारा जानकारी में आया कि मार्च में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के देवलगावराजा तहसील के शिवनी आरमाल नामक गांव के रहने वाले राज्य सरकार से सम्मानित किसान कैलाश नागरे ने जहरीली दवा पीकर आत्महत्या कर ली थी. किसान की लाश उसी के खेत में पाई गई थी, 43 वर्षीय किसान को महाराष्ट्र सरकार की ओर से वर्ष 2020 में युवा किसान पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. किसान फरवरी 2025 में शिवानी आरमाल तालाब पर गांववासियों को हो रही पानी की समस्या के लिए 5 दिन अनशन पर भी बैठा था. §देश में किसानों की आत्महत्या एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे लेकर केंद्र और राज्य सरकारें कई प्रयास कर रही हैं. इसमें कई योजनाओं, परियोजनाओं के जरिए किसानों को लाभ मुहैया कराया जाता है. लेकिन महाराष्ट्र के 5 जिलों में पिछले 24 सालों का डाटा देखने पर समस्या काफी बड़ी प्रतीत होती है. बता दें, महाराष्ट्र के अमरावती राजस्व संभाग के पांच जिलों में पिछले 24 साल में 21,219 किसानों ने आत्महत्या की है.

