कृषि अनुसंधान को नई दिशा देने और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों की जानकारी साझा करने के उद्देश्य से Punjab Agricultural University के कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज में “जीनोमिक्स और प्रोटीओमिक्स नवाचार द्वारा फसल सुधार” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शुरू हुआ। 11 से 12 मार्च तक चलने वाली इस कार्यशाला को Department of Biotechnology के डीबीटी बिल्डर कार्यक्रम के तहत सहयोग प्राप्त है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में जीवन विज्ञान विभागों की अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना, आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं विकसित करना और छात्रों व युवा शोधकर्ताओं को बहु-विषयक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की शुरुआत जैव रसायन विभाग की सहायक प्रोफेसर Anju Sharma ने की। इस अवसर पर माइक्रोबायोलॉजिस्ट और परियोजना सह-समन्वयक Jupinder Kaur ने मुख्य अतिथि Ajmer Singh Dhatt, कॉलेज की डीन Kiran Bains, कॉलेज की अनुसंधान समन्वयक Neena Singla, स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक Yogesh Vikal, जैव रसायन विभाग की प्रमुख Satvir Kaur, रसायन विभाग की प्रमुख Manpreet Kaur तथा वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख Namarta Gupta सहित उपस्थित वैज्ञानिकों, अध्यापकों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की डीन और परियोजना समन्वयक डॉ. किरण बैंस ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को जीनोमिक्स और प्रोटीओमिक्स जैसी आधुनिक ओमिक्स तकनीकों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि इन अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से फसलों के विकास और सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है, खासकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों के विकास में।
मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए डॉ. अजरमेर सिंह धत्त ने आयोजन टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं मूलभूत अनुसंधान और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद करने और इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ जीनोमिक्स और प्रोटीओमिक्स तकनीकों में हो रहे नवीनतम शोध और उनके कृषि क्षेत्र में उपयोग पर व्याख्यान देंगे। साथ ही इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को इन तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया जाएगा।
कार्यशाला में छात्रों और शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जो कृषि अनुसंधान में उन्नत ओमिक्स तकनीकों के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। कार्यक्रम के अंत में जैव रसायन विभाग की वैज्ञानिक और परियोजना सह-समन्वयक Rimaljeet Kaur ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को उपयोगी और ज्ञानवर्धक अनुभव की शुभकामनाएं दीं।

