बहु-राज्य सहकारी समितियों के चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली के Vigyan Bhavan में “मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज के चुनावों में पारदर्शिता और शुचिता” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन Cooperative Election Authority (CEA) ने Ministry of Cooperation के अंतर्गत किया।
सेमिनार में देशभर की बहु-राज्य सहकारी समितियों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक मंडल के सदस्य, रिटर्निंग ऑफिसर, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरणों के प्रतिनिधि, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री Krishan Pal Gurjar ने कहा कि यह सेमिनार सहकारिता आंदोलन के लिए ऐतिहासिक पहल है। पहली बार देशभर की बहु-राज्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र होकर सहकारी चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के “सहकार से समृद्धि” के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर सुधार लागू कर रही है।
मंत्री ने बताया कि Multi-State Cooperative Societies (Amendment) Act, 2023 के माध्यम से सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इसी के तहत 11 मार्च 2024 को एक स्वतंत्र Cooperative Election Authority की स्थापना की गई, जिसे बहु-राज्य सहकारी समितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि अब तक यह प्राधिकरण लगभग 240 चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित कर चुका है, जबकि करीब 70 चुनाव वर्तमान में जारी हैं। आने वाले वित्तीय वर्ष में लगभग 130 और चुनाव कराए जाने की संभावना है। यह व्यवस्था सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार द्वारा किए गए सुधारों में सहकारी समितियों के निदेशक मंडल की अवधि को निश्चित करना भी शामिल है, ताकि चुनावों में अनावश्यक देरी न हो और प्रशासनिक अनुशासन बना रहे। इसके अलावा संशोधित कानून के तहत बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट आरक्षित की गई है। इससे सहकारी संस्थाओं में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा।
सेमिनार में Devendra Kumar Singh, अध्यक्ष, Cooperative Election Authority ने कहा कि सहकारी संस्थाएं लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण के सिद्धांत पर आधारित होती हैं। इसलिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी, सहभागी और विश्वसनीय होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी समितियों के उपनियमों में स्पष्टता होना जरूरी है, ताकि मतदान अधिकार, सक्रिय सदस्यता और चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े विवादों से बचा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान “चुनावों के माध्यम से पारदर्शिता को बढ़ावा” और “चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता को मजबूत करना” विषयों पर दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने सहकारी चुनाव प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
सेमिनार का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा। इससे सहकारिता आंदोलन को भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सशक्त बनाने में मदद मिलेगी और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहकारिता क्षेत्र अहम भूमिका निभाएगा।

