किसानों को टिकाऊ और रसायन-मुक्त खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya, पालमपुर में एक दिवसीय प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर एंड नेचुरल फार्मिंग विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें चंबा जिले के भटियात और सलूणी ब्लॉकों के किसान और कृषि अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में कुल 31 प्रतिभागियों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. (Dr.) Ashok Kumar Panda ने अपने संदेश में कहा कि प्राकृतिक खेती टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती के प्रसार से मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों की आय में भी सुधार संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन और जागरूकता प्रदान करने में कृषि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यशाला की अध्यक्षता Dr. Janardan Singh, विभागाध्यक्ष, ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर एंड नेचुरल फार्मिंग ने की। उन्होंने मिट्टी, पानी, हवा और पर्यावरण पर रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती इन चुनौतियों का टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करती है और किसानों को प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर खेती करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा समर्थित Bharatiya Prakritik Krishi Paddhati (बीपीकेपी) योजना के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में Nitin Kumar Sharma, परियोजना निदेशक Agricultural Technology Management Agency (ATMA), चंबा भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के महत्व और लाभों पर विस्तृत तकनीकी जानकारी दी। किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, गोबर और गोमूत्र आधारित खाद तैयार करने और उनके उपयोग की व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके साथ ही मल्चिंग और फसल विविधीकरण जैसी तकनीकों के बारे में भी जानकारी साझा की गई।
इस अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक Dr. Gopal Katna और Dr. Rakesh Chauhan भी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला चंबा जिले के कृषि विभाग तथा Greeneri Agribusiness Pvt. Ltd., नादौन (हमीरपुर) के सहयोग से आयोजित की गई।
कार्यक्रम के अंत में Anil Sharma, निदेशक Greeneri Agribusiness Pvt. Ltd. ने कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

