दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की 1.5 वर्ष की सफेद बाघिन की जटिल हड्डी (ऑर्थोपेडिक) सर्जरी को आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (ICAR-IVRI), इज़तनगर, बरेली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। दोनों पिछले पैरों की हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर होने के कारण बाघिन की हालत चिंताजनक थी, जिसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने लगभग छह घंटे तक चली चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर उसे नया जीवन देने का प्रयास किया।
जानकारी के अनुसार, सफेद बाघिन को 2 मार्च 2026 को दोनों पिछले पैरों में चोट लग गई थी, जिसके कारण उसकी टिबिया (पिंडली की हड्डी) में फ्रैक्चर हो गया। शुरुआती उपचार और स्थिरीकरण दिल्ली चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक द्वारा किया गया। लेकिन चोट की गंभीरता को देखते हुए मामले को आगे की विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए आईसीएआर-आईवीआरआई, इज़तनगर के निदेशक के पास भेजा गया।
इसके बाद आईसीएआर-आईवीआरआई के अनुभवी पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने 7 मार्च को इस दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह सर्जरी करीब छह घंटे तक चली, जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए दोनों पैरों की टूटी हुई हड्डियों को सावधानीपूर्वक जोड़ा गया।
सर्जरी के दौरान बाघिन के दाएं पैर की टिबिया को डबल प्लेटिंग तकनीक की मदद से स्थिर किया गया, जिससे हड्डी को मजबूत सहारा मिल सके। वहीं बाएं पैर की टिबिया को रॉड-प्लेट कंस्ट्रक्ट तकनीक के माध्यम से ठीक किया गया, जिससे टूटी हुई हड्डियों का सही संरेखण (alignment) और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। इस तरह की उन्नत तकनीकों के प्रयोग से सर्जरी की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
आईसीएआर-आईवीआरआई के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि संस्थान में आमतौर पर इस प्रकार की उन्नत सर्जरी पालतू पशुओं पर की जाती रही है। लेकिन किसी वन्य जीव, विशेष रूप से बाघ जैसे बड़े मांसाहारी जानवर पर इतनी जटिल ऑर्थोपेडिक सर्जरी करना पहली बार हुआ है। इस कारण इसे संस्थान की पशु चिकित्सा विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
सर्जरी के बाद फिलहाल बाघिन को विशेष निगरानी में रखा गया है। विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी पोस्ट-ऑपरेटिव केयर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि संक्रमण या अन्य जटिलताओं से बचाव किया जा सके और हड्डियों के सही तरीके से जुड़ने की प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बाघिन की रिकवरी इसी तरह सकारात्मक रहती है, तो आने वाले समय में वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य गतिविधियां करने में सक्षम हो सकेगी। इस सफल सर्जरी से न केवल वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि भारत में पशु चिकित्सा विज्ञान तेजी से आधुनिक तकनीकों के साथ आगे बढ़ रहा है।

