भारत का कुल निर्यात (मर्चेंडाइज और सेवाएँ) अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक 790.86 अरब डॉलर का अनुमानित रहा, जो पिछले वर्ष के 747.58 अरब डॉलर के मुकाबले 5.79% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस दौरान मर्चेंडाइज निर्यात 402.93 अरब डॉलर रहा, जिसमें 1.84% की वृद्धि हुई। गैर-पेट्रोलियम निर्यात 354.12 अरब डॉलर तक बढ़ा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.03% अधिक है।
फरवरी 2026 में मर्चेंडाइज निर्यात के प्रमुख क्षेत्रों में इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स, गहने और मीट, डेयरी व पोल्ट्री प्रोडक्ट्स शामिल हैं। उदाहरण के लिए, इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात फरवरी 2025 के 9.17 अरब डॉलर से बढ़कर फरवरी 2026 में 10.36 अरब डॉलर हुआ, जबकि इलेक्ट्रॉनिक गुड्स में 10.37% की वृद्धि दर्ज की गई।
सेवाओं का निर्यात अप्रैल–फरवरी 2025-26 में 387.93 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 351.93 अरब डॉलर से 10.23% अधिक है। सेवाओं के निर्यात में वृद्धि से व्यापार संतुलन को मजबूती मिली है।निर्यात बढ़ाने वाले शीर्ष देशों में चीन, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, स्पेन और हांगकांग शामिल हैं। वहीं, प्रमुख आयात स्रोत देशों में चीन, अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, यूके और पेरू शामिल रहे।
फरवरी 2026 में कुल आयात (मर्चेंडाइज और सेवाएँ) 80.09 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.64% अधिक है। अप्रैल–फरवरी 2025–26 में कुल आयात 900.51 अरब डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 109.64 अरब डॉलर तक बढ़ गया।
विशेष रूप से मर्चेंडाइज और गैर-गहनों एवं गैर-पेट्रोलियम वस्तुओं का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो रही है। सेवाओं के निर्यात में वृद्धि ने व्यापार संतुलन में सुधार किया है और विदेशी मुद्रा अर्जन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।यह आंकड़े बताते हैं कि भारत का निर्यात और सेवाओं का क्षेत्र आने वाले समय में निरंतर मजबूती और विस्तार की दिशा में है।

