देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में मिश्रित रुझान देखने को मिला है। 20 मार्च 2026 तक कुल 42.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (43.69 लाख हेक्टेयर) की तुलना में 1.02 लाख हेक्टेयर कम है।
हालांकि कुल बुवाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुछ फसलों में सकारात्मक वृद्धि भी देखने को मिली है, जो किसानों के लिए राहत की खबर है।
धान (चावल) की बुवाई इस वर्ष 27.86 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 28.65 लाख हेक्टेयर से 0.80 लाख हेक्टेयर कम है। इसी तरह मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई भी घटकर 6.04 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले वर्ष 6.84 लाख हेक्टेयर थी।
वहीं मक्का की बुवाई में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो 5.00 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.24 लाख हेक्टेयर रह गई है। ज्वार में भी कमी देखी गई, जबकि बाजरा और रागी में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, दलहन फसलों में इस बार बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है। दलहन का कुल बुवाई क्षेत्र बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 3.47 लाख हेक्टेयर था। इसमें मूंग की बुवाई 2.57 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुवाई 1.28 लाख हेक्टेयर रही, जो दोनों में वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि देश में दालों की उपलब्धता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तिलहन फसलों में बुवाई लगभग स्थिर रही है। कुल तिलहन क्षेत्र 4.69 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष के 4.73 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। हालांकि सूरजमुखी और मूंगफली में मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जबकि तिल की बुवाई में हल्की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई क्षेत्र में यह उतार-चढ़ाव मौसम की परिस्थितियों, जल उपलब्धता और बाजार की मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। दलहन में बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि किसान अब फसल विविधीकरण की ओर ध्यान दे रहे हैं।
कुल बुवाई में मामूली गिरावट के बावजूद दलहन और कुछ तिलहन फसलों में वृद्धि सकारात्मक संकेत दे रही है। आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति और कृषि नीतियों के प्रभाव से बुवाई के आंकड़ों में और बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे खरीफ पूर्व कृषि परिदृश्य और स्पष्ट होगा।

