देश में सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले और सुधार लागू किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य सहकारी समितियों और बैंकों को सशक्त बनाना, किसानों और छोटे उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना है।
सबसे बड़ा बदलाव सहकारी बैंकों को डिजिटल और आधुनिक बैंकिंग से जोड़ने के रूप में सामने आया है। ‘आधार सक्षम भुगतान प्रणाली’ (AePS) के लिए लाइसेंस शुल्क घटा दिया गया है और शुरुआती तीन महीनों तक यह सुविधा मुफ्त दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बायोमेट्रिक के जरिए घर बैठे बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।
सरकार ने सहकारी बैंकों को अधिक ऋण देने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। अब ये बैंक बिना गारंटी के ऋण दे सकेंगे और 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ मिलेगा। साथ ही, कृषि सहकारी समितियों के लिए ऋण सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है, जिससे कृषि और डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
सहकारी बैंकों को नई शाखाएं खोलने और आधुनिक सेवाएं देने में भी आसानी दी गई है। कई पुराने नियमों में ढील देकर बैंकिंग सेवाओं को तेज और सरल बनाया गया है। इसके अलावा, ग्रामीण सहकारी बैंकों को आरबीआई की ओम्बड्समैन योजना में शामिल किया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
टैक्स के मोर्चे पर भी सहकारी समितियों को राहत दी गई है। 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये की आय पर अधिभार घटाया गया है और न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 18.5% से कम कर 15% किया गया है। नकद लेनदेन और नकद निकासी पर भी नियमों में ढील दी गई है, जिससे समितियों के कामकाज में आसानी होगी।
कृषि और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तीन नई राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियां बनाई गई हैं—बीज, ऑर्गेनिक उत्पाद और निर्यात के लिए। इनके जरिए किसानों को बेहतर बीज, जैविक उत्पादों का बाजार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात के अवसर मिलेंगे।
सहकारी चीनी मिलों को भी राहत और प्रोत्साहन दिया गया है। उन्हें टैक्स में छूट, सस्ती दरों पर ऋण और एथेनॉल उत्पादन के लिए सहायता दी जा रही है। साथ ही, शीरा पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी।
शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ की स्थापना की गई है। इसके अलावा, लाखों सहकारी सदस्यों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए देशभर में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
डिजिटल सुधारों के तहत राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस तैयार किया गया है, जिसमें 8 लाख से अधिक समितियों का डेटा शामिल है। इससे नीति बनाने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
सरकार सहकारी उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहकारी उत्पादों की पहुंच बढ़ाई जा रही है, जिससे किसानों और छोटे उत्पादकों को बेहतर दाम मिल सकें।
इन सभी पहलों का मकसद सहकारी आंदोलन को नई दिशा देना और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि मजबूत सहकारी व्यवस्था से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त होगी और लोगों की आय में स्थायी वृद्धि होगी।

