देश में अगर किसी कारोबारी सेक्टर ने बिना बड़े सरकारी सहारे लगातार तेज रफ्तार से तरक्की की है, तो वह पोल्ट्री इंडस्ट्री (Poultry Industry) है। पोल्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सेक्टर हर साल 6 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और अब इसका कुल कारोबार 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। बढ़ती आबादी, बदलती खानपान की आदतें और सस्ते प्रोटीन की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।
भारत ही नहीं, विदेशों में भी अंडे और चिकन की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। देश के कुल मीट उत्पादन में चिकन की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं अंडा उत्पादन भी 14 हजार करोड़ के स्तर को पार कर गया है। ऐसे में पोल्ट्री फार्मिंग—चाहे चिकन के लिए हो या अंडों के लिए—दोनों ही विकल्प किसानों और निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
अगर अंडा उत्पादन की बात करें, तो अब पारंपरिक तरीकों की जगह हाईटेक पोल्ट्री फार्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन फार्मों में ऑटोमैटिक फीडिंग, पानी की सप्लाई और अंडों की कलेक्शन जैसी व्यवस्थाएं होती हैं, जिससे श्रम लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है। हालांकि यह पूरी तरह बाजार की मांग पर निर्भर करता है कि फार्मर चिकन उत्पादन करें या अंडों पर फोकस करें।
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 106 अंडों की उपलब्धता है। डायटीशियन भी मानते हैं कि कम लागत में अधिक प्रोटीन पाने के लिए अंडा और चिकन सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि इनकी खपत लगातार बढ़ रही है।
लेयर पोल्ट्री फार्म (Poultry Industry) की खास बात यह है कि एक दिन का चूजा 45 से 50 रुपये में मिल जाता है और 120 से 130 दिन के भीतर मुर्गी अंडा देना शुरू कर देती है। शुरुआत में अंडे का वजन 25 ग्राम होता है, जो धीरे-धीरे बढ़कर 53 से 56 ग्राम तक पहुंच जाता है। एक मुर्गी 19 से 20 महीने में लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन दे देती है।
जब उत्पादन घटकर 60-70 प्रतिशत रह जाता है, तो मुर्गियों को ‘मोल्टिंग’ प्रक्रिया में डाला जाता है। इस दौरान उनका खानपान बदला जाता है और कुछ समय के लिए अंडा उत्पादन बंद हो जाता है। करीब 20 दिन बाद मुर्गियां फिर से 80-90 प्रतिशत उत्पादन देने लगती हैं।
हाईटेक पोल्ट्री फार्म की लागत की बात करें तो 30 हजार मुर्गियों के फार्म पर करीब 700 रुपये प्रति मुर्गी खर्च आता है। जैसे-जैसे संख्या बढ़ती है, लागत घटकर 600 रुपये प्रति मुर्गी तक आ जाती है। वहीं सामान्य फार्म में यह खर्च करीब 500 रुपये प्रति मुर्गी होता है, लेकिन इसमें श्रम अधिक लगता है क्योंकि अंडा कलेक्शन, फीडिंग और सफाई हाथ से करनी पड़ती है।
हरियाणा का जींद और उत्तर प्रदेश का गोरखपुर पोल्ट्री के बड़े हब के रूप में उभर चुके हैं, जहां फार्म बनाने के लिए अनुभवी ठेकेदार भी आसानी से उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर, बढ़ती मांग और तकनीकी सुधारों के चलते पोल्ट्री सेक्टर आने वाले समय में और तेजी से बढ़ने वाला है, जो किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफे का मजबूत जरिया बन रहा है।

