कृषि क्षेत्र में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं डीएआरई सचिव डॉ. एम. एल. जाट से आज एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में वैगेनिंगेन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च (नीदरलैंड) और रायथु साधिकारा संस्था, आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल थे।
इस बैठक के दौरान एग्रोइकोलॉजी और प्राकृतिक खेती जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। तीनों संस्थानों के बीच साझेदारी के माध्यम से टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में कृषि को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने की आवश्यकता है। एग्रोइकोलॉजी और प्राकृतिक खेती जैसी पद्धतियां न केवल मिट्टी की सेहत को सुधारती हैं, बल्कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम करती हैं। इससे किसानों की लागत घटती है और उनकी आय में सुधार की संभावना बढ़ती है।
वैगेनिंगेन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च विश्व स्तर पर कृषि अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रसिद्ध है, जबकि रायथु साधिकारा संस्था भारत में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली अग्रणी संस्था है। इन दोनों संस्थानों के अनुभव और विशेषज्ञता को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक नेटवर्क के साथ जोड़ने से किसानों के लिए बेहतर और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकेंगे।
बैठक में यह भी विचार किया गया कि किसानों और कृषि से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को कैसे मजबूत किया जाए। इसके तहत आधुनिक तकनीकों, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर दिया जाएगा। इससे किसानों को नई तकनीकों को अपनाने में आसानी होगी और वे बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी खेती को ढाल सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थाओं के बीच सहयोग से कृषि क्षेत्र में नवाचार को गति मिलेगी। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद मिलेगी।
इस पहल को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की प्राथमिकताओं के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें टिकाऊ और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में इस सहयोग के तहत कई संयुक्त परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है, जो किसानों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाएंगी।
कुल मिलाकर, ICAR, WUR और RySS के बीच यह बैठक कृषि के भविष्य को अधिक टिकाऊ, वैज्ञानिक और किसान हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

