भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़कर नवाचार और तकनीक आधारित आधुनिक उद्योग के रूप में उभर रहा है। सरकार की नीतिगत सहायता, निवेश और नई तकनीकों के उपयोग से देश में मत्स्य पालन स्टार्टअप्स का एक मजबूत परितंत्र विकसित हो रहा है, जो न केवल उत्पादन बढ़ा रहा है बल्कि किसानों और मछुआरों की आय में भी सुधार ला रहा है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 से अब तक सरकार ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के सतत विकास के लिए करीब 39,272 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस निवेश और प्रोत्साहन के चलते देश में 300 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हो चुके हैं, जो मत्स्य पालन की पूरी वैल्यू चेन में नई तकनीकों के माध्यम से सुधार ला रहे हैं।
इन स्टार्टअप्स की खासियत यह है कि वे आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), मशीन लर्निंग (ML) और ब्लॉकचेन का उपयोग कर रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से जल गुणवत्ता की निगरानी, तालाब प्रबंधन, रोगों की पहचान, फीड मैनेजमेंट और उत्पादन का सटीक अनुमान लगाना संभव हो रहा है। इससे न केवल लागत कम हो रही है बल्कि उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।
मत्स्य पालन क्षेत्र में पुनर्संचारी जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। ये तकनीकें कम पानी और सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन करने में मदद करती हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी यह क्षेत्र अधिक लाभकारी बन रहा है।
सरकार इस क्षेत्र में कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, सौर ऊर्जा आधारित चिलिंग यूनिट्स, स्मार्ट आइस उत्पादन प्रणाली और AI आधारित गुणवत्ता परीक्षण जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है। इससे समुद्री खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और निर्यात के अवसर बढ़ते हैं। साथ ही, अपशिष्ट को कम करने और मूल्य संवर्धन को बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
ड्रोन तकनीक का उपयोग भी मत्स्य पालन में एक नई क्रांति ला रहा है। ड्रोन की मदद से तालाबों की मैपिंग, जल गुणवत्ता का विश्लेषण, मछलियों की संख्या का आकलन और पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान तेजी से की जा रही है। खास बात यह है कि सरकार ने जीवित मछलियों के परिवहन के लिए ड्रोन तकनीक विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। इस परियोजना के तहत एक ऐसा ड्रोन तैयार किया जा रहा है, जो 10 किलोमीटर तक 100 किलोग्राम जीवित मछलियों का परिवहन कर सकेगा।
स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई विशेष पहलें भी शुरू की हैं। मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित स्टार्टअप सम्मेलन और “स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से नए विचारों को मंच दिया जा रहा है। चयनित स्टार्टअप्स को अनुदान, प्रशिक्षण, इनक्यूबेशन और निवेशकों से जुड़ने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, “मत्स्य मंथन” जैसी ज्ञान-आधारित पहल के माध्यम से विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को एक साथ लाकर नए विचारों और तकनीकों पर चर्चा की जा रही है। अब तक इस श्रृंखला के 11 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जो क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान और नीति निर्माण में सहायक साबित हो रहे हैं।
स्टार्टअप्स को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए देशभर में पांच प्रमुख मत्स्य पालन बिजनेस इनक्यूबेशन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र उद्यमियों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिससे वे अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक विकसित कर सकें।

