खेती-किसानी में कीटों का प्रकोप लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। फसलों को बचाने के लिए किसानों को अक्सर महंगे और हानिकारक रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है और मिट्टी की सेहत भी खराब होती है। लेकिन अब इस समस्या का समाधान एक नई तकनीक के रूप में सामने आया है। ICAR-CIPHET, लुधियाना द्वारा विकसित सोलर पावर्ड यूनिवर्सल इंसेक्ट ट्रैप किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
यह आधुनिक ट्रैप पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है और दिन-रात यानी 24×7 ऑटोमैटिक तरीके से काम करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कई तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है, जैसे स्टिकी ट्रैप, फेरोमोन, रंग आधारित आकर्षण और पानी के ट्रैप। इन सभी के संयोजन से यह अलग-अलग प्रकार के कीटों को प्रभावी ढंग से अपनी ओर आकर्षित कर पकड़ता है और फसलों को नुकसान से बचाता है।
इस सोलर ट्रैप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसान इसे अपनी जरूरत के अनुसार 2 फीट से 8 फीट तक ऊंचाई में एडजस्ट कर सकते हैं। यह न केवल खेतों में बल्कि गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षा के लिए भी उपयोगी है। धान, गेहूं, बैंगन, मिर्च, पत्तागोभी, सरसों, प्याज, अमरूद और हरी मटर जैसी कई फसलों पर यह प्रभावी पाया गया है।
तकनीकी रूप से यह उपकरण बेहद सरल लेकिन उपयोगी है। इसमें सोलर पैनल, बैटरी बॉक्स, नीले और पीले रंग के चिपचिपे जाल, प्रकाश स्रोत, पानी का पात्र और एक ऑटोमैटिक लाइट सेंसर सिस्टम शामिल है। दिन में यह सौर ऊर्जा को स्टोर करता है और रात में स्वतः सक्रिय होकर कीटों को आकर्षित करता है। इसका हल्का और मजबूत डिजाइन इसे खेतों में आसानी से लगाने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने योग्य बनाता है।
इस तकनीक का पेटेंट भी फाइल किया जा चुका है और इसके व्यावसायिक उपयोग के अधिकार Parashar Agrotech Bio Pvt. Ltd. को दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपकरण किसानों की लागत को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह ट्रैप पूरी तरह केमिकल-फ्री है, जिससे न तो फसल को कोई नुकसान होता है और न ही मिट्टी या पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। इससे कीटनाशकों के उपयोग में कमी आएगी, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित खाद्य उत्पाद मिलेंगे।
कुल मिलाकर, यह सोलर इंसेक्ट ट्रैप खेती में एक नई दिशा की शुरुआत है। यह तकनीक किसानों को सस्ती, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करती है, जिससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ खेती भी ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक बन सकेगी।

