देशभर में मौसम एक बार फिर तेजी से करवट ले रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में ही दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, जिसका असर उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत तक देखने को मिलेगा। पहला पश्चिमी विक्षोभ 3-4 अप्रैल के बीच असर डालेगा, जबकि दूसरा 7 अप्रैल के आसपास सक्रिय होगा।
IMD के अनुसार, 4 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। खासतौर पर कश्मीर घाटी में 4 अप्रैल को कहीं-कहीं भारी बारिश होने का अनुमान है।
दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। 3 से 5 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। 4 अप्रैल को दिनभर बादल छाए रहने और दोपहर के बाद बारिश की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान गिरकर 29 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 3 से 7 अप्रैल के बीच मौसम अस्थिर रहेगा। यहां गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, खासकर फसलों को नुकसान की आशंका के चलते सतर्क रहने की जरूरत है।
पूर्वी भारत में भी मौसम का असर दिखेगा। झारखंड, बिहार और ओडिशा में 5 से 8 अप्रैल के बीच आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों—असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 5 से 9 अप्रैल के बीच भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
दक्षिण भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 3 से 7 अप्रैल तक रुक-रुक कर बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि इन मौसमी गतिविधियों के चलते देशभर में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे या सामान्य के आसपास रह सकता है। इससे जहां एक ओर गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर आंधी, बिजली और ओलावृष्टि से नुकसान की आशंका भी बनी रहेगी।
ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

