डिजिटल तकनीक के माध्यम से किसानों और मछुआरों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, मुंबई और भाकृअनुप–भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से दो दिवसीय किसान एवं मछुआरा मेला आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम “किसान सारथी 2.0: संवर्धन, संचालन, रखरखाव एवं समर्थन” परियोजना के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन का सहयोग और वित्तपोषण प्राप्त है।
मुंबई स्थित ICAR-CIFE परिसर में आयोजित इस मेले का उद्देश्य अनुसंधान, तकनीक और जमीनी स्तर के उपयोग के बीच मजबूत कड़ी बनाना तथा किसानों और मछुआरों तक वैज्ञानिक जानकारी को सरल रूप में पहुंचाना था। कार्यक्रम के पहले दिन संस्थान के वैज्ञानिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और विभिन्न सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि दूसरे दिन मछुआरे, मछुआरिनें, मत्स्य पालक, मछली विक्रेता और अन्य हितधारक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इस दो दिवसीय आयोजन में कुल 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पहले दिन लगभग 300 प्रतिभागियों ने भौतिक और ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर ज्ञान साझा किया, जबकि दूसरे दिन महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों से आए 125 मछुआरों और मत्स्य पालकों ने सक्रिय भागीदारी की। इनके अलावा 75 अन्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और परियोजना टीम के सदस्यों ने भी चर्चाओं को समृद्ध बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसमें “किसान सारथी” पहल के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद प्रतिभागियों को “किसान सारथी 2.0” प्लेटफॉर्म की विशेषताओं, उद्देश्यों और उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों और मछुआरों को वैज्ञानिक सलाह, तकनीकी मार्गदर्शन और समस्याओं के समाधान तक आसान पहुंच प्रदान करता है।
मेले के दौरान प्रतिभागियों को किसान सारथी ऐप और पोर्टल से जुड़ी जानकारी हिंदी, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध कराई गई, जिससे अधिक से अधिक लोग इस प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकें। यह पहल डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ तकनीक को सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।
दूसरे दिन मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें समय पर जानकारी मिलती है, जिससे उनकी आजीविका मजबूत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे प्लेटफॉर्म संस्थानों और मछुआरों के बीच संपर्क को मजबूत करने में मदद करते हैं। साथ ही, मछली पालन और विपणन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किए गए।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में लाइव डेमो, प्रस्तुतियां और संवादात्मक चर्चाएं शामिल रहीं। प्रतिभागियों को किसान सारथी ऐप डाउनलोड करने, पंजीकरण करने और अपनी समस्याओं से जुड़े प्रश्न पूछने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। मत्स्य क्षेत्र के लिए विशेष रूप से विकसित डोमेन भी प्रस्तुत किए गए और प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिभागियों से सुझाव लिए गए।
इस मेले की एक खास विशेषता इसका बहुभाषी स्वरूप रहा, जिससे विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रतिभागियों को समझने और सीखने में आसानी हुई। आयोजन टीम के कुशल समन्वय और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

