वैश्विक तेल बाजार इस समय गंभीर दबाव के दौर से गुजर रहा है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जहां ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। यह उछाल केवल बाजार की सामान्य हलचल का नतीजा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं का सीधा असर है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लंबे समय से बंद रहना इस संकट की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है।
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 3.4% की बढ़त दर्ज की गई और इसकी कीमत 111.9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 4.7% की तेजी आई, जिससे यह 100.9 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी निवेशकों और विश्लेषकों की उस चिंता को दर्शाती है, जो वैश्विक आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को लेकर बनी हुई है।
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से पहले वैश्विक दैनिक तेल और LNG आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता था। लेकिन इस मार्ग की लगातार नाकेबंदी अब नौवें सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है, जो शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा लंबा समय है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यह मार्ग अप्रैल तक खुल जाएगा, लेकिन मौजूदा हालात ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
इस संकट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी एक अहम कारण है। दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि जब तक ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं की जाएगी। इस सख्त रुख के चलते कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर नजर आ रही हैं।
इसी बीच, वैश्विक मांग को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेल की मांग में संभावित गिरावट को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि, चीन इस स्थिति में एक अहम भूमिका निभा सकता है। खबरें हैं कि चीन घरेलू भंडार बढ़ने के चलते ईंधन निर्यात फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में कुछ राहत मिल सकती है।
तेल बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने अपने पूर्वानुमानों में बदलाव किया है। ING ने दूसरी तिमाही के लिए ब्रेंट का औसत मूल्य अनुमान 96 डॉलर से बढ़ाकर 104 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। वहीं चौथी तिमाही के लिए 92 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, गोल्डमैन सैक्स ने भी अपने अनुमानों को संशोधित करते हुए 2026 की अंतिम तिमाही में ब्रेंट का औसत मूल्य 90 डॉलर और WTI का 83 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई है।
कुल मिलाकर, तेल बाजार में यह उथल-पुथल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बनती जा रही है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द नहीं खुलता और कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

