भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Ministry of Coal India के नेतृत्व में चार कोयला खदानों के लिए उत्पादन एवं विकास समझौतों (CMDPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। खास बात यह है कि ये देश की पहली व्यावसायिक कोयला खदानें हैं जिनमें भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification – UCG) के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
यह पहल न केवल कोयला खनन के पारंपरिक मॉडल में बदलाव का संकेत देती है, बल्कि भारत के विशाल कोयला भंडारों के अधिकतम उपयोग की दिशा में भी एक परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है।
किन कंपनियों को मिली खदानें
वाणिज्यिक कोयला खनन नीलामी के 14वें दौर के तहत हुए इन समझौतों में Reliance Industries Limited को आंध्र प्रदेश स्थित रेचेरला और चिंतलपुड़ी सेक्टर A1 खदानें आवंटित की गई हैं, जबकि Axis Energy Ventures India Private Limited को ओडिशा में बेलपहाड़ डिप एक्सटेंशन और टांगारडीही ईस्ट खदानें मिली हैं।
इन खदानों में से कुछ आंशिक रूप से और कुछ पूरी तरह से खोजी जा चुकी हैं, जिससे इनके विकास और उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है।
क्या है UCG तकनीक और क्यों है खास
Underground Coal Gasification (UCG) एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कोयले को जमीन के अंदर ही सिंथेटिक गैस में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक खनन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों कम होते हैं।
यह तकनीक विशेष रूप से उन गहरी या पतली कोयला परतों के उपयोग में सहायक है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से निकालना संभव या लाभकारी नहीं होता। इससे भारत के उपयोग योग्य ऊर्जा संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
ऊर्जा ही नहीं, उर्वरक और रसायन क्षेत्र को भी लाभ
UCG के माध्यम से तैयार होने वाली सिंथेटिक गैस का उपयोग यूरिया और अमोनिया जैसे उर्वरकों के उत्पादन में किया जा सकता है। इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, यह गैस रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग में प्राकृतिक गैस और नेफ्था के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो सकती है, जिससे मेथनॉल, डाइमिथाइल ईथर (DME) और सिंथेटिक ईंधन का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
आर्थिक और रोजगार के बड़े अवसर
इन चार नए समझौतों के साथ, वाणिज्यिक कोयला नीलामी के तहत कुल 138 खदानों के लिए समझौते हो चुके हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 331.544 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं से:
- करीब ₹42,980 करोड़ का वार्षिक राजस्व प्राप्त होगा
- ₹48,231 करोड़ का निवेश आकर्षित होगा
- लगभग 4.34 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
यह पहल भारत के “आत्मनिर्भर ऊर्जा” लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ और कुशल तकनीकों को अपनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
Ministry of Coal India ने स्पष्ट किया है कि वह पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं, निवेशक-अनुकूल नीतियों और उन्नत तकनीकों के माध्यम से न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाने बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।
भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसे अत्याधुनिक प्रावधानों के साथ यह समझौता भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि उर्वरक, रसायन और ईंधन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
