लद्दाख में कृषि विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से Indian Council of Agricultural Research (भाकृअनुप) और University of Ladakh के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत लद्दाख विश्वविद्यालय को क्षेत्र के चार प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके)—लेह-I, लेह-II (न्योमा), कारगिल-I और कारगिल-II (जांस्कर)—का मेजबान संस्थान बनाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल लद्दाख में कृषि नवाचार और विस्तार प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
इस समझौते पर भाकृअनुप की ओर से उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह और लद्दाख विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति डॉ. साकेत खुशवाहा ने हस्ताक्षर किए। यह सहयोग न केवल संस्थागत ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र की विशेष भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विकास को भी बढ़ावा देगा।
गौरतलब है कि इससे पहले ये कृषि विज्ञान केंद्र Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology Srinagar के प्रशासनिक नियंत्रण में थे। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह नई व्यवस्था स्थानीय जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिससे क्षेत्रीय विकास को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य लद्दाख जैसे कठिन और ठंडे मरुस्थलीय क्षेत्र में जलवायु-सहिष्णु (Climate-Resilient) कृषि को बढ़ावा देना है। इसके तहत आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने और नई पद्धतियों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, किसानों, युवाओं और अन्य हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से लद्दाख में कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकेगा। केवीके के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल प्रबंधन, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होगी।
इसके अलावा, यह सहयोग कृषि आधारित उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करेगा। लद्दाख के युवाओं को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, क्षेत्र में ज्ञान-आधारित विकास को भी गति मिलेगी, जो दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
Indian Council of Agricultural Research और University of Ladakh के बीच यह समझौता लद्दाख में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह न केवल किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में सतत और वैज्ञानिक कृषि विकास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

