जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने देश की खेती-किसानी को नई दिशा देने वाले कई अहम फैसलों और योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब देश को विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में विभाजित कर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार खेती को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले केवल राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ और रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित होती थीं, लेकिन अब रीजनल स्तर पर ऐसी कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राज्य-विशिष्ट रणनीतियां बनाई जाएंगी। इस नई व्यवस्था से मिट्टी, जलवायु, जल संसाधन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन और कृषि पद्धतियों को बेहतर बनाया जा सकेगा।
सम्मेलन में फार्मर आईडी को कृषि क्षेत्र की रीढ़ बताते हुए Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि सभी किसानों को एकीकृत पहचान से जोड़ा जाएगा। इससे खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण पूरी तरह पारदर्शी और लक्षित होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले तीन महीनों में देश के अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो जाएगी, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और तेजी से मिल सकेगा।
तिलहन उत्पादन को लेकर भी सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत वर्ष 2024–25 में 429.89 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया, जो एक रिकॉर्ड है। अब सरकार का लक्ष्य तिलहन का क्षेत्र बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन को 69.7 मिलियन टन तक पहुंचाना है। इसके लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को बेहतर बीज, तकनीक और बाजार सुविधाएं मिलेंगी।
दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि बीज उत्पादन बढ़ाने, नई किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने और दाल मिलों का नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही अरहर, उड़द और मसूर जैसी फसलों की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की योजना है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिलेगा।
कृषि में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए “विकसित कृषि संकल्प अभियान” शुरू किया गया है। इसके तहत लगभग 16,000 वैज्ञानिक “लैब टू लैंड” मॉडल के माध्यम से सीधे किसानों तक नई तकनीक पहुंचाएंगे। इससे खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होगा।
प्राकृतिक खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर देते हुए सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन को बढ़ावा देने और नकली खाद व कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानून लाने पर सहमति जताई है। इससे किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इनपुट उपलब्ध होंगे और उनकी लागत भी कम होगी।
इसके अलावा आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में किसानों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। सरकार किसानों से सीधे खरीद कर बड़े शहरों तक आपूर्ति सुनिश्चित करेगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
कुल मिलाकर जयपुर रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस ने भारतीय कृषि के लिए एक नया रोडमैप प्रस्तुत किया है, जो आत्मनिर्भरता, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के सहारे किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

