जयपुर में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से देश में कृषि सुधारों के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan की पहल पर आयोजित इस सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस रणनीति तैयार की गई।
सम्मेलन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे। उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma की विशेष उपस्थिति ने इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया।
क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस से बदलेगा कृषि का ढांचा
केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि अब पारंपरिक रबी-खरीफ बैठकों की जगह एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के आधार पर क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इससे हर राज्य की मिट्टी, जलवायु और संसाधनों के अनुसार अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। उन्होंने इसे “एक्शन प्लेटफॉर्म” बताते हुए कहा कि इससे नीतियों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा।
तीन बड़े लक्ष्य: आय, खाद्य और पोषण सुरक्षा
कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए—किसानों की आय बढ़ाना, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाना। उन्होंने बताया कि जहां गेहूं और चावल में देश आत्मनिर्भर है, वहीं दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना अब प्राथमिकता है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
फार्मर आईडी से बदलेगा सिस्टम
फार्मर आईडी को कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताते हुए Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि इससे खाद वितरण, बैंक लोन, बीमा और सरकारी मदद पूरी तरह पारदर्शी और तेज़ हो जाएगी। डिजिटल प्रोफाइल के आधार पर किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और भ्रष्टाचार व बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
MSP और खरीद व्यवस्था पर जोर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दलहन और तिलहन की खरीद PM-AASHA योजना के तहत की जा रही है, जबकि गेहूं और चावल की खरीद खाद्य विभाग द्वारा होती है। चना, मसूर और तुअर जैसी फसलों की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने पर सरकार का फोकस है। जहां सीधी खरीद संभव नहीं होगी, वहां भावांतर भुगतान मॉडल लागू किया जाएगा।
विकसित कृषि संकल्प अभियान से तकनीक का विस्तार
कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए “विकसित कृषि संकल्प अभियान” को राज्यों के अनुसार लागू किया जाएगा। Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीम सीधे खेतों तक पहुंचकर किसानों को नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीके सिखाएगी।
राज्यों के साथ मिलकर बनेगा रोडमैप
राज्यों के कृषि रोडमैप को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद Indian Council of Agricultural Research के वैज्ञानिकों और मंत्रालय के अधिकारियों की संयुक्त टीम राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।
योजनाओं में लचीलापन और तेज क्रियान्वयन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस बार राज्यों को योजनाओं के चयन में अधिक स्वतंत्रता दी गई है। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार ड्रिप सिंचाई, मैकेनाइजेशन या अन्य योजनाओं को प्राथमिकता दे सकते हैं। उन्होंने बजट का समय पर उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
आपदा प्रबंधन और बीमा पर फोकस
मौसमीय असंतुलन और प्राकृतिक आपदाओं के बीच किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने राज्यों को आश्वासन दिया कि किसानों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
कुल मिलाकर जयपुर में आयोजित यह क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन भारतीय कृषि के लिए एक मजबूत दिशा तय करता है। “टीम एग्रीकल्चर” की अवधारणा के साथ केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा भी और मजबूत होगी।

