हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में अप्रैल महीने में अचानक हुई बर्फबारी ने सेब उत्पादक (apple farmer) किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आमतौर पर इस समय मौसम सुहावना रहता है और बागानों में फूल खिलने लगते हैं, लेकिन इस बार प्रकृति ने करवट बदलते हुए किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। शिमला जिले के बागी, रत्नारी, बालसां और चोपल जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में बर्फ गिरने की खबर है।
बागी क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि बागों को आंधी और ओलों से बचाने के लिए लगाए गए नेट इस बार नुकसान का कारण बन गए। “नेट पर तीन से चार इंच तक बर्फ जमा हो गई, जिससे उसका वजन बढ़ गया और बांस के सहारे टूट गए। कई पेड़ भी इसकी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए,” उन्होंने कहा। इस तरह की स्थिति ने किसानों को आर्थिक रूप से झटका दिया है।
रत्नारी के किसान सतपाल चौहान के अनुसार, यह बर्फबारी सिर्फ पेड़ों तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचाएगी, बल्कि इस साल की पूरी फसल पर भी असर डाल सकती है। उन्होंने बताया कि इस समय सेब के पेड़ों पर गुलाबी कलियां और फूल होते हैं, जो अत्यधिक ठंड से प्रभावित हो सकते हैं। इससे परागण (पॉलिनेशन) प्रक्रिया बाधित होगी और उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार मौसम की मार देखी जा रही है। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने पहले ही फसलों को नुकसान पहुंचाया था, और अब बर्फबारी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। किसानों का कहना है कि इस तरह का अनियमित मौसम अब एक नई सामान्य स्थिति बनता जा रहा है। सतपाल चौहान ने याद करते हुए कहा, “अप्रैल 2022 में भी हमें इसी तरह की बर्फबारी का सामना करना पड़ा था। अब यह चिंता का विषय बनता जा रहा है।”
इस अचानक आई ठंड से पाला पड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। पाला सेब के फूलों और नई कलियों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। यदि तापमान इसी तरह गिरता रहा, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
इन परिस्थितियों में किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपने बागानों में सालभर मेहनत की, लेकिन मौसम की इस अनिश्चितता ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। हालांकि कुछ किसान अब नई तकनीकों और उपायों की ओर ध्यान दे रहे हैं, जैसे एंटी-फ्रॉस्ट तकनीक और बेहतर सपोर्ट सिस्टम, लेकिन अचानक आई आपदाओं से पूरी तरह बच पाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में नुकसान को कम किया जा सके। फिलहाल, हिमाचल के सेब किसान आसमान की ओर देख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम जल्द सामान्य हो, ताकि उनकी फसल बच सके।

