लखनऊ में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 (Lucknow Agricultural Science Congress) का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक व्यापक और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे लाभप्रद और टिकाऊ बनाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने “प्रोडक्शन से प्रॉस्पेरिटी” तक की इस यात्रा को भविष्य की दिशा बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
तीन दिवसीय इस कांग्रेस को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मंच केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रहे, बल्कि यहां से ठोस कार्ययोजना निकलनी चाहिए। इसमें कृषि के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा होगी, जिसमें जमीनी अनुभव, नवाचार और सफल प्रयोगों को साझा किया जाएगा। इससे किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले निर्णय लिए जा सकेंगे।
उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी निवास करती है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि है। इसके बावजूद प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में करीब 21 प्रतिशत का योगदान देता है। यह उपलब्धि योजनाबद्ध प्रयासों, प्रभावी नीतियों और किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य ने कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है, जो एक बड़ी सफलता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का ऐतिहासिक आधार कृषि रहा है। एक समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसका मुख्य कारण मजबूत कृषि व्यवस्था थी। उस दौर में किसान केवल उत्पादक नहीं था, बल्कि वह प्रसंस्करण और निर्माण कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाता था। लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हो गई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बनकर रह गया, जिससे आर्थिक असंतुलन पैदा हुआ।
मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीकों को कृषि के भविष्य का आधार बताते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक सटीक, लागत प्रभावी और लाभकारी बनाया जा सकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसान को उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी श्रृंखला में मजबूत बनाया जाए, तो कृषि न केवल लाभ का माध्यम बनेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

