लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई तेजी से दिलाने के लिए ‘वेदर इंफॉर्मेशन एंड नेटवर्क डाटा सिस्टम’ (विंड्स) योजना को तेजी से लागू कर रही है। यह योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मौसम संबंधी सटीक आंकड़ों को सीधे फसल बीमा पोर्टल से जोड़ने का काम करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खराब मौसम या आपदा की स्थिति में किसानों की क्षति का सही आकलन हो और उन्हें समय पर मुआवजा मिल सके।
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2024-25 से अगले पांच वर्षों के लिए लागू करने की योजना बनाई है। इसके तहत प्रदेश भर में आधुनिक मौसम उपकरणों का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया जा रहा है, जिससे रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा। इससे न केवल बीमा क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बल्कि कृषि सलाह (एग्रीकल्चर एडवाइजरी) और आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।
इस योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों और Skymet Weather Services के प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिए कि पहले चरण का काम हर हाल में 30 मई 2026 तक पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों से जुड़ी इस परियोजना में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पहले चरण के तहत प्रदेश में 86 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और 11,846 ऑटोमेटिक रेन गेज (एआरजी) स्थापित किए जाने हैं। इसके अलावा पूरे राज्य में ब्लॉक स्तर पर 826 एडब्ल्यूएस और ग्राम पंचायत स्तर पर 57,702 एआरजी लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। यह नेटवर्क मौसम के सूक्ष्म स्तर के आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जिससे फसल नुकसान का सटीक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
योजना के क्रियान्वयन में तेजी भी देखने को मिल रही है। क्लस्टर-1 के अंतर्गत आने वाले 39 जिलों में सर्वेक्षण कार्य जारी है। वहीं गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, मेरठ और मिर्जापुर जैसे जिलों में 13 ऑटोमेटिक रेन गेज पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है।
वित्तीय दृष्टि से भी सरकार ने इस योजना को मजबूत आधार दिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, राज्यांश के रूप में 9.77 करोड़ रुपये पहले ही संबंधित कंपनी को दिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 88.02 करोड़ रुपये का भुगतान भी 24 मार्च 2026 को कर दिया गया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि विंड्स पोर्टल के माध्यम से एकत्रित डेटा का उपयोग सरकार आपदा प्रबंधन, कृषि योजनाओं और किसानों को समय-समय पर सलाह देने के लिए निःशुल्क करेगी। इससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘विंड्स’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी और बीमा क्लेम की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

