रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh ने तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित Defence Services Staff College (डीएसएससी) में 81वें स्टाफ कोर्स के दीक्षांत समारोह में भाग लेकर युवा सैन्य अधिकारियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 44 विदेशी प्रतिभागियों सहित सभी छात्र अधिकारियों को कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी और उनके समर्पण व मेहनत की सराहना की।
अपने संबोधन में रक्षा सचिव ने कहा कि डीएसएससी जैसे संस्थान भविष्य के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के दौर में तीनों सेनाओं—थल, जल और वायु—के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्तता बेहद आवश्यक है, और इस दिशा में डीएसएससी का योगदान सराहनीय है।
उन्होंने मित्र देशों से आए अधिकारियों की उपस्थिति को विशेष महत्व देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पेशेवर क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और आपसी विश्वास को भी बढ़ाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने देशों और भारत के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
दीक्षांत समारोह में कई देशों के रक्षा अटैची भी मौजूद रहे, जो इस संस्थान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और महत्व को दर्शाता है। रक्षा सचिव ने संस्थान द्वारा प्रदान किए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और शिक्षा की सराहना करते हुए कहा कि यह अधिकारियों को जटिल सैन्य और रणनीतिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करता है।
1948 में स्थापित डीएसएससी भारत का एक प्रमुख त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान है, जहां भारतीय सशस्त्र बलों के साथ-साथ मित्र देशों के चयनित मध्य-स्तरीय अधिकारियों को पेशेवर सैन्य शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान का उद्देश्य अधिकारियों को भविष्य की नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार करना और उन्हें रणनीतिक सोच, योजना निर्माण तथा संयुक्त संचालन की क्षमता से सशक्त बनाना है।
अब तक इस प्रतिष्ठित संस्थान में 19,500 से अधिक भारतीय और 2,000 से ज्यादा विदेशी अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इनमें से कई अधिकारी आगे चलकर अपने-अपने देशों की सेनाओं और सरकारों में शीर्ष नेतृत्व पदों पर आसीन हुए हैं, जो डीएसएससी की गुणवत्ता और प्रभाव को दर्शाता है।
रक्षा सचिव ने अंत में अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने प्रशिक्षण का उपयोग देश सेवा और वैश्विक शांति को मजबूत करने में करें। उन्होंने विश्वास जताया कि डीएसएससी से प्रशिक्षित अधिकारी भविष्य में न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

