मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी पहल करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान सीहोर, देवास, विदिशा और रायसेन जिलों के लिए समग्र कृषि रोडमैप जारी किया। इस पहल का उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाना है, ताकि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि हो सके।
महोत्सव के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का अवलोकन किया और किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय केवल उत्पादन बढ़ाने का नहीं, बल्कि सही फसल चयन और टिकाऊ खेती को अपनाने का है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और जैविक खेती को भी अपनाएं, जिससे कम लागत में अधिक लाभ संभव हो सके।
जारी किए गए इस कृषि रोडमैप में जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण और वैल्यू एडिशन को प्राथमिकता दी गई है। चारों जिलों की जलवायु, मिट्टी और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए तैयार इस योजना का लक्ष्य खेती को जलवायु-सहिष्णु बनाना और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना है। मंत्री ने बताया कि इन क्षेत्रों में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता और गिरता जल स्तर एक बड़ी चुनौती है, जिसे वैज्ञानिक तरीकों से दूर करने की जरूरत है।
उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और सोयाबीन से आगे बढ़कर टमाटर, प्याज, लहसुन, भिंडी, शिमला मिर्च, अनार जैसी फसलों के साथ ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी। उनका मानना है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए “Soil Mobile App” भी लॉन्च किया गया है। इस ऐप के माध्यम से किसान अपने खेत में खड़े होकर ही यह जान सकेंगे कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता है। मंत्री ने चेतावनी दी कि बिना जानकारी के रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि किसानों की लागत भी बढ़ाता है। इसलिए सॉइल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग किया जाना चाहिए।
उत्पादन बढ़ाने के लिए “बीज ग्राम” योजना को भी प्रमुखता दी गई है। हर ब्लॉक में लगभग 10 गांवों को बीज ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन होगा। इस पहल से किसानों को बेहतर बीज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगे, जिससे उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। इस योजना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का विशेष सहयोग रहेगा।
इसके अलावा, किसानों को रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश में “क्लीन प्लांट सेंटर” स्थापित करने की योजना है। वहीं, छोटे और सीमांत किसानों को महंगे कृषि यंत्रों की समस्या से राहत देने के लिए मशीन बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे, जहां से किसान किराए पर आधुनिक मशीनें प्राप्त कर सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि कोल्ड चेन, पैक हाउस और कृषि अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि फल और सब्जियों के नुकसान को कम किया जा सके और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत कर सामूहिक खेती और विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह कृषि रोडमैप केवल एक योजना नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि की दिशा में एक ठोस कदम है, जो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की कृषि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

