Syngenta आज पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। दुनिया का सबसे पुराना उद्योग मानी जाने वाली कृषि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद से तेजी से बदल रही है। कंपनी के चीफ इंफॉर्मेशन और डिजिटल ऑफिसर फिरोज शेख के नेतृत्व में यह परिवर्तन और भी तेज हुआ है, जहां तकनीक को सीधे किसानों के फैसलों और फसल उत्पादन से जोड़ा जा रहा है।
Syngenta एक प्रमुख कृषि इनपुट प्रदाता है, जो फसल सुरक्षा उत्पादों के साथ-साथ मक्का, सोयाबीन और टमाटर जैसे बीजों का विकास करती है। 100 से अधिक देशों में अपनी मौजूदगी और लगभग 60,000 कर्मचारियों के साथ कंपनी ने 2025 में करीब 28.5 अरब डॉलर का कारोबार दर्ज किया। इतने बड़े स्तर पर काम करने के कारण Syngenta का प्रभाव वैश्विक कृषि व्यवस्था के साथ-साथ स्थानीय खेती पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
फिरोज शेख के अनुसार, उनका काम केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे डेटा और AI के जरिए कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देते हैं। उनका उद्देश्य है कि तकनीक का उपयोग इस तरह किया जाए, जिससे वैज्ञानिकों को नए उत्पाद विकसित करने में मदद मिले और किसानों को खेतों में बेहतर निर्णय लेने का अवसर प्राप्त हो।
Syngenta की खास रणनीति यह है कि वह अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर काम करती है। कंपनी में डेटा वैज्ञानिक, इंजीनियर, मृदा विशेषज्ञ और कीट वैज्ञानिक मिलकर ‘कम्प्यूटेशनल एग्रोनॉमी’ जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। इस समन्वय के जरिए खेत की मिट्टी, मौसम और अन्य आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसे मॉडल तैयार किए जाते हैं, जो किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए सटीक सुझाव देते हैं।
आज की खेती को शेख “जिग्सॉ पजल” की तरह बताते हैं, जहां रसायन, जेनेटिक्स और मशीनरी पहले से मौजूद हैं, लेकिन डेटा और AI इस पहेली का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहे हैं। आधुनिक ट्रैक्टर अब “चलते-फिरते डेटा सेंटर” बन चुके हैं, जो खेतों से लगातार डेटा इकट्ठा करते हैं। इस डेटा को विश्लेषित कर किसानों को यह बताया जाता है कि किस समय कौन-सी फसल बोनी है, कितनी सिंचाई करनी है और कौन-सा उर्वरक सबसे उपयुक्त रहेगा।
AI का एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह विशेषज्ञता को आम किसानों तक पहुंचा रहा है। अब किसान अपने स्मार्टफोन से फसल की समस्या की तस्वीर लेकर तुरंत उसका समाधान पा सकते हैं। AI मॉडल उस समस्या की पहचान कर उचित सलाह देते हैं, वह भी किसान की स्थानीय भाषा में। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी वही जानकारी मिल रही है, जो पहले केवल विशेषज्ञों तक सीमित थी।
Syngenta की AI रणनीति चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—रिसर्च लैब में AI, सप्लाई चेन में AI, कंपनी के अंदर AI और किसानों के हाथों में AI। अनुसंधान में AI नई किस्मों के विकास को तेज करता है, जबकि सप्लाई चेन में यह खरीद और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाता है। वहीं, खेतों में AI किसानों को वास्तविक समय में निर्णय लेने में मदद करता है।
कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अब 150 मिलियन एकड़ से अधिक भूमि पर काम कर रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर डेटा इकट्ठा कर पैटर्न और ट्रेंड्स का विश्लेषण किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, किसी एक क्षेत्र में फसल रोग का जल्दी पता लगाकर दूसरे क्षेत्रों के किसानों को पहले से सतर्क किया जा सकता है।
भविष्य की बात करें तो 2050 तक वैश्विक आबादी 10 अरब के करीब पहुंचने की संभावना है, जिससे खाद्य उत्पादन की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में सीमित कृषि भूमि के भीतर अधिक उत्पादन करना एक बड़ी चुनौती है। फिरोज शेख मानते हैं कि इसका समाधान केवल डिजिटल तकनीकों और AI के जरिए ही संभव है, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम कर सकते हैं।
आने वाले समय में AI के साथ रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का मेल खेती को और उन्नत बनाएगा। ड्रोन पहले से ही खेतों की निगरानी और छिड़काव में उपयोग हो रहे हैं, और भविष्य में स्वचालित मशीनें खेती के जटिल कार्यों को भी संभाल सकती हैं।
कुल मिलाकर, Syngenta का AI आधारित दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक पारंपरिक कृषि को अधिक स्मार्ट, टिकाऊ और लाभकारी बना सकती है, जिससे भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

